शिमला। राजधानी के भरयाल कूड़ा संयंत्र के पास रखे कचरे में लगी आग बेकाबू हो गई है। तीन दिन से प्लास्टिक समेत दूसरे कचरे के जलने से उठ रहे विषैले धुएं से राजधानी की आबोहवा भी दूषित हो गई है।
आग बेकाबू होने के बाद नगर निगम ने पंजाब से पोकलैंड मशीन मंगवाई है। शनिवार से यह मशीन आग बुझाने के काम में लग जाएगी। बताया जा रहा है कि कूड़े के ढेर में लगी यह आग करीब 20 मीटर की गहराई तक पहुंच गई है। इसे अब न पानी से बुझाया जा सकता है और न ही दमकल की टीमें इस पर काबू पा सकीं। लगातार निकल रहे जहरीले धुएं से आसपास के गांवों के लोग परेशान हो गए हैं। सांस से जुड़ी बीमारियों से ग्रसित लोगों पर सबसे ज्यादा परेशानी झेलनी पड़ रही है। महापौर कुसुम सदरेट समेत नगर निगम के अधिकारियों ने फिर भरयाल का दौरा किया और आग पर काबू पाने के लिए उठाए जा रहे कदमों की जानकारी ली। आग के चलते जेसीबी मशीनें यहां काम नहीं कर पा रही हैं। इसलिए पंजाब से पोकलैंड जेसीबी मंगाई है जो आग के बावजूद कचरे को पलटकर आग बुझा सकती है। महापौर ने कहा कि आग पर जल्द काबू पाने के प्रयास किए जा रहे हैं। उधर संयुक्त आयुक्त अनिल शर्मा ने इस संयंत्र के लिए बालूगंज से 24 घंटे पानी की सप्लाई देने के निर्देश जारी कर दिए हैं।
एमसी की लापरवाही जनता पर भारी
कूड़ा संयंत्र में कचरे से बिजली बनाने का काम दो साल से ठप पड़ा है। रोजाना करीब 70 टन कचरा शिमला शहर से भरयाल पहुंच रहा है। यहां संयंत्र ठप होने से यह कचरा एक ढेर के रूप में रखा जा रहा है। अब यह ढेर विशालकाय हो गया है। विशेषज्ञों की मानें तो कचरे की गहराई में अपने आप गैस पैदा होने लगती है जो बाद में आग का रूप धारण कर लेती है। इतनी गहराई तक पानी नहीं पहुंच पाता। इसीलिए इस कचरे को पलटना पड़ता है।