शिमला। फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट (पॉक्सो/दुष्कर्म) शिमला के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विवेक शर्मा की अदालत ने नाबालिग से दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट से जुड़े मामले में अहम फैसला सुनाते हुए पति, ससुर और सास को सभी आरोपों से बरी कर दिया है। अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष यह बुनियादी तथ्य साबित करने में पूरी तरह नाकाम रहा कि पीड़िता घटना के समय नाबालिग थी। मामले के अनुसार, ढल्ली थाना में दर्ज प्राथमिकी के तहत आरोप था कि राजगढ़ (सिरमौर) निवासी आरोपी ने साल 2023 में नाबालिग को बहला-फुसलाकर भगाया और उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए जिससे पीड़िता ने एक बच्ची को जन्म दिया था। मामले में आरोपी के माता-पिता पर भी धमकाने व सहयोग का आरोप लगाया गया था। सुनवाई के दौरान पीड़िता अदालत में अपने पहले के बयानों से मुकर गई। पीड़िता ने अदालत को बताया कि उसका जन्म 17 नवंबर 2004 को हुआ था और उसने बालिग होने के बाद वर्ष 2024 में अपनी मर्जी से आरोपी से शादी की थी। पीड़िता ने स्पष्ट किया कि दोनों परिवारों में विवाद के चलते वह मायके गई थी, लेकिन अब वह अपने पति के साथ खुशी-खुशी रह रही है। वहीं, बचाव पक्ष की ओर से पेश दस्तावेजों में पीड़िता की मां की ओर से पहले एसडीएम और तहसीलदार के समक्ष दिए गए शपथ पत्र सामने आए जिनमें पीड़िता की जन्मतिथि 17 नवंबर 2004 दर्ज थी। इसके अलावा पंचायत के जन्म रजिस्टर में भी कोई रिकॉर्ड नहीं मिला। साक्ष्यों और बयानों के विरोधाभास को देखते हुए अदालत ने तीनों आरोपियों को दोषमुक्त करार देते हुए बरी कर दिया है। संवाद