शिमला। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी (कोर्ट नंबर 3) शिमला, मनु प्रिंजा की अदालत ने धोखाधड़ी से जुड़े एक मामले में सुन्नी निवासी चुन्नी लाल को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। आरोपी पर आईपीसी की धारा 420 और 406 के तहत आरोप तय किए गए थे। अभियोजन पक्ष अदालत के समक्ष आरोपी पर लगे आरोपों को उचित संदेह से परे साबित करने में पूरी तरह नाकाम रहा। अभियोजन पक्ष के अनुसार, शिकायतकर्ता बस्ती राम ने आरोप लगाया था कि एक व्यक्ति ने खुद को राजेश शर्मा बताते हुए संपर्क किया और कहा कि उसके पिता बिजली बोर्ड में कार्यरत थे जिनके निधन के बाद करीब 6,00,000 रुपये मिलने हैं। इसके लिए एफडीआर बनवाने व रकम निकालने के नाम पर उसने शिकायतकर्ता से 1.40 लाख रुपये की मांग की। 1 अक्तूबर 2013 को शिकायतकर्ता ने नगर निगम शिमला कार्यालय के बाहर उक्त व्यक्ति को लैपटॉप बैग में 1.40 लाख रुपये नकद दिए जिसके बाद वह कथित तौर पर पैसे लेकर फरार हो गया। बाद में पुलिस ने जांच के दौरान दावा किया कि खुद को राजेश शर्मा बताने वाला व्यक्ति असल में चुन्नी लाल था और उसे गिरफ्तार कर लिया गया। अदालत ने पाया कि रिकॉर्ड पर ऐसा कोई भी दस्तावेज पेश नहीं किया गया जिससे यह साबित हो सके कि चुन्नी लाल ही राजेश शर्मा था, न ही कोई शिनाख्त परेड कराई गई थी। संवाद