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Shimla News: भ्रष्टाचार के मामले में बाग पंचायत के पूर्व प्रधान और पंचायत सचिव बरी

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शिमला। राजधानी की विशेष अदालत (वन) अजय मेहता की अदालत ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और आईपीसी के एक मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए ग्राम पंचायत बाग के पूर्व प्रधान ईश्वर दास और पंचायत सचिव कुलदीप कुमार को आरोपों से बरी कर दिया है। अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ गबन और धोखाधड़ी के आरोपों को संदेह से परे साबित करने में विफल रहा। वर्ष 2014 में ग्रामीणों ने ग्राम पंचायत बाग के कामकाज और विभिन्न विकास कार्यों में कथित अनियमितताओं को लेकर शिकायत दर्ज कराई थी। विजिलेंस विभाग की जांच के बाद वर्ष 2015 में मामला दर्ज किया गया। अभियोजन पक्ष का मुख्य आरोप था कि वर्ष 2008-09 के दौरान राजकीय प्राथमिक स्कूल पंदोआ की मरम्मत के लिए स्वीकृत राशि में से 39,600 रुपये से लोहे के 12 क्विंटल एंगल खरीदे गए थे। आरोप था कि इन एंगल को बेचकर सरकारी धन का गबन किया गया और न तो स्टॉक रजिस्टर में इसकी प्रविष्टि की गई और न ही मरम्मत का काम पूरा हुआ था। गवाहों के बयानों और साक्ष्यों से यह साबित हुआ कि लोहे के एंगल खरीदे गए थे और वे स्कूल परिसर के बाहर काफी समय तक रखे हुए थे। गवाहों और शिकायतकर्ता ने स्वीकार किया कि ग्रामीणों के बीच आपसी विवाद (एक पक्ष स्कूल मरम्मत और दूसरा पक्ष मैदान की फेंसिंग चाहता था) के कारण मरम्मत का काम समय पर पूरा नहीं हो सका था। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष यह साबित करने के लिए कोई ठोस और विश्वसनीय सबूत पेश नहीं कर पाया कि उक्त लोहे के एंगल आरोपियों की ओर से बेचे गए थे या उन्होंने राशि का दुरुपयोग किया था। पर्याप्त सबूतों के अभाव में अदालत ने दोनों आरोपियों को सभी आरोपों से बरी कर दिया। संवाद
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