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Shimla News: चेक बाउंस मामला समय से पहले दायर होने पर आरोपी बरी

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शिमला। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट नंबर-1 शिमला प्रतिभा नेगी की अदालत ने चेक बाउंस के एक पुराने मामले में शिमला निवासी आरोपी प्रकाश ठाकुर को बरी कर दिया है। अदालत ने कुमारसैन निवासी हर गोपाल शर्मा की ओर से दायर की गई शिकायत को इस आधार पर खारिज कर दिया कि यह कानूनी शिकायत अनिवार्य वैधानिक अवधि समाप्त होने से पहले ही दायर कर दी गई थी। शिकायतकर्ता हर गोपाल शर्मा ने मई 2014 में यूको बैंक के चेक के माध्यम से आरोपी प्रकाश ठाकुर को 5,00,000 रुपये का लोन दिया था। इस देनदारी को चुकाने के लिए आरोपी ने कैनरा बैंक में अपने खाते से सितंबर 2016 में 5,00,000 रुपये का एक चेक जारी किया था। इस चेक को जब बैंक में प्रस्तुत किया गया तो यह 9 सितंबर 2016 को पर्याप्त धनराशि न होने के कारण बाउंस हो गया था। इसके बाद 22 सितंबर 2016 को रजिस्टर्ड डाक के माध्यम से एक कानूनी नोटिस भेजा गया। भुगतान न होने पर 7 अक्तूबर 2016 को एनआई एक्ट की धारा 138 के तहत अदालत में शिकायत दर्ज करवाई गई। अदालत ने पाया कि शिकायतकर्ता ने बैंक स्टेटमेंट और गवाहों की गवाहियों (जिसमें यूको बैंक और डाक विभाग के आधिकारिक रिकॉर्ड शामिल हैं) के माध्यम से वित्तीय लेनदेन और 5,00,000 रुपये के हस्तांतरण को सफलतापूर्वक साबित किया है। नोटिस की सेवा की अवधि की गणना को लेकर निर्णय महत्वपूर्ण मोड़ पर आया। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के फैसलों तथा सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए अदालत ने नोट किया कि जहां कोई नोटिस डिलीवरी की वास्तविक तारीख के स्पष्ट प्रमाण के बिना रजिस्टर्ड डाक से भेजा जाता है, वहां नोटिस जारी होने की तारीख से 30 दिनों के बाद उसकी तामील होने का कानूनी अनुमान लगाया जाता है। चूंकि नोटिस 22 सितंबर 2016 को भेजा गया था इसलिए इसे 21 अक्तूबर 2016 को तामील हुआ माना गया जिससे आरोपी को भुगतान करने के लिए 15 दिन का समय मिलता। हालांकि, चूंकि शिकायतकर्ता ने इस अनिवार्य वैधानिक समयसीमा के पूरा होने से पहले ही यानी 7 अक्तूबर 2016 को मुकदमा दायर कर दिया था इसलिए यह शिकायत कानूनी रूप से समय से पहले थी।
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