2,78,812 रुपये का चेक अपर्याप्त धनराशि होने के कारण हो गया था बाउंस
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट नंबर-2 ने चेक बाउंस के मामले में फैसला सुनाया है। न्यायाधीश एकांश कपिल की अदालत ने चंबा जिले के निवासी शुकरदीन को नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 138 के तहत दोषी करार दिया है। मामला हिमाचल प्रदेश अल्पसंख्यक वित्त एवं विकास निगम का है। निगम ने आरोप लगाया था कि शुकरदीन ने वर्ष 2014 में किराना की दुकान खोलने के लिए 2.50 लाख रुपये का ऋण लिया था। ऋण की अदायगी नहीं होने पर आरोपी ने 27 सितंबर 2019 को 2,78,812 रुपये का चेक जारी किया था, लेकिन अपर्याप्त धनराशि होने के कारण चेक बाउंस हो गया। इसके बाद निगम की ओर से कानूनी नोटिस भी आरोपी को भेजे गए लेकिन आरोपी ने राशि का भुगतान नहीं किया। दिसंबर 2019 में इस संबंध में शिकायत दर्ज कराई गई। कोर्ट ने सबूतों की जांच के बाद पाया कि चेक जारी होना, उसका बाउंस होना, कानूनी नोटिस की सेवा और भुगतान न होना ये सभी आवश्यक तत्व साबित हो गए हैं। आरोपी ने बचाव में दावा किया कि ऋण उनके पड़ोसी नेकराज ने लिया था और उन्होंने केवल खाली चेक दिए थे, लेकिन कोर्ट ने इस दावे को खारिज कर दिया। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि खाली चेक पर हस्ताक्षर कर देने के बाद भी धारा 138 के तहत दायित्व बना रहता है और आरोपी पर सबूत का बोझ था, जिसे उन्होंने पूरा नहीं किया। अदालत ने शुकरदीन को धारा 138 के तहत दोषी ठहराया है। सजा की मात्रा पर बहस के लिए अगली तारीख को सूचीबद्ध किया गया है।