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Cement Crisis: सीमेंट विवाद सुलझाने के लिए अब कंसलटेंट नियुक्त, तीसरे दौर की वार्ता भी विफल

Mon, 02 Jan 2023 09:04 PM IST
अरविन्द ठाकुर अमर उजाला ब्यूरो, शिमला

सार

हिमाचल परिवहन प्राधिकरण के सचिव घनश्याम ने बैठक के बाद बताया कि सीमेंट ढुलाई की दरों को लेकर बुलाई बैठक में कोई समझौता नहीं हुआ है।
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दाड़लाघाट में बंद सीमेंट प्लांट। - फोटो : संवाद
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विस्तार
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हिमाचल प्रदेश में सीमेंट विवाद को सुलझाने के लिए सोमवार को अदाणी समूह और ट्रक ऑपरेटरों के बीच तीसरे दौर की वार्ता भी विफल हो गई है। अब राज्य सरकार की हिमकान एजेंसी को कंसलटेंट (परामर्शदाता) नियुक्त किया गया है। कंसलटेंट शुक्ला कमेटी के तय फार्मूले के आधार पर मालभाड़े की दरें तय करेगा। चार दिन के भीतर कंसलटेंट अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगा। उसके बाद दोनों पक्षों की फिर बैठक बुलाई जाएगी।

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विवाद सुलझाने के लिए गठित उप समिति के अध्यक्ष और हिमाचल प्रदेश खाद्य आपूर्ति विभाग के निदेशक केसी चमन की अध्यक्षता में सोमवार सुबह 11:30 से दोपहर बाद 4:30 बजे तक बैठक चली। बैठक में दाड़लाघाट और बरमाणा ट्रक यूनियनों के 50 और अदाणी समूह के सात प्रतिनिधि मौजूद रहे। सीमेंट ढुलाई की दरों को लेकर दोनों पक्ष झुकने को तैयार नहीं हैं।

दोनों पक्ष अपनी-अपनी दलीलों पर अड़े रहे। उप समिति के सदस्य सचिव और हिमाचल परिवहन प्राधिकरण के सचिव घनश्याम ने बैठक के बाद बताया कि सीमेंट ढुलाई की दरों को लेकर बुलाई बैठक में कोई समझौता नहीं हुआ है। इस मामले को सुलझाने के लिए कंसलटेंट को नियुक्त किया है। दोनों पक्षों की अगले दौर की बैठक की तारीख जल्द तय की जाएगी। 
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यह है शुक्ला कमेटी का फार्मूला
डीजल प्रति लीटर एक रुपये बढ़ता है तो ट्रक भाड़ा 40 पैसे प्रति किलोमीटर प्रति टन के हिसाब से बढ़ेगा। इसी तरह से टायरों, एक्सल, चैसी के रेट बढ़ने और बीमा राशि बढ़ने पर समय-समय पर सीमेंट ढुलाई की दरें बढ़ाने का प्रावधान है। वर्ष 2019 के बाद से सीमेंट ढुलाई के रेट नहीं बढ़े हैं।

ट्रक मालिक दलील देते हैं कि शुक्ला कमेटी के फार्मूले के आधार पर भी सीमेंट की ढुलाई की दरें 12.10 रुपये प्रति किलोमीटर प्रति टन बनता है जबकि वे 10.58 पैसे ले रहे हैं। अदाणी समूह 6 रुपये प्रति किलोमीटर प्रति टन मालभाड़ा देने पर अड़ा है। 2005 में भी इसी तरह के विवाद के बाद सरकार ने शुक्ला कमेटी का गठन किया था।

अंबुजा कंपनी में जल्द समाधान नहीं निकला तो ऑपरेटर करेंगे चक्का जाम

दाड़लाघाट में ट्रक ऑपरेटरों और कंपनी के बीच गतिरोध 20वें दिन भी जारी रहा। सभी ट्रांसपोर्ट सोसायटियों के सैकड़ों ऑपरेटरों ने अंबुजा सीमेंट प्लांट के मुख्यद्वार से बस स्टैंड और स्यार से होते हुए अंबुजा चौक तक आक्रोश रैली निकाली। ऑपरेटरों ने अंबुजा चौक पर लगभग दो घंटे तक कंपनी के खिलाफ नारेबाजी की। स्थिति से निपटने के लिए भारी संख्या में पुलिस बल तैनात था।

ऑपरेटरों ने कहा कि शीतकालीन सत्र के बाद होने वाली बैठक का इंतजार रहेगा। अगर बैठक में कोई हल नहीं होता है तो ऑपरेटर अपने परिवार के सदस्यों और चालकों के साथ चक्का जाम करेंगे। दाड़लाघाटर में तंबू भी गाड़े जाएंगे। अगर मुद्दे को लेकर जल्दी कोई कदम नहीं उठाए तो उग्र आंदोलन करेंगे। ऑपरेटरों ने सरकार से जल्द गतिरोध को खत्म करने की मांग की है।

उधर, शिमला में सोमवार को सरकार की ओर से गठित सब कमेटी की बैठक थी, लेकिन यह बेनतीजा रही। अगली बैठक शीतकालीन सत्र के बाद होगी। ऑपरेटरों का कहना है कि सब कमेटी की बैठक से कुछ उम्मीद थी, लेकिन 10 मिनट में बैठक खत्म कर दी गई। कहा कि ट्रक ऑपरेटर यूनियन और अंबुजा सीमेंट प्लांट प्रबंधन के बीच टकराव की स्थिति पैदा हो गई है। 
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यूनियनों को करनी पड़ रही खराब सीमेंट की भरपाई

ट्रक यूनियन नालागढ़ के ट्रक संचालक अपनी गाड़ियां हिमाचल में भेजने से कतराने लगे हैं। हाल ही में बिलासपुर के समीप हड़ताल कर रहे कर्मियों की ओर से चालकों को पीटा गया। उनके ट्रकों में सीमेंट पर पानी डाल दिया गया। इससे चार से पांच लाख रुपये प्रति ट्रक नुकसान हुआ है। सीमेंट कंपनी ने नुकसान की भरपाई करने के लिए हाथ खड़े कर दिए हैं, जिससे यूनियन को ही इसकी भरपाई करनी पड़ेगी। 

ट्रक यूनियन नालागढ़ के करीब 500 ट्रक प्रतिदिन सीमेंट लेकर जाते हैं। इनमें 100 ट्रक हिमाचल के पहाड़ी क्षेत्रों में जाते हैं, लेकिन पिछले दिनों हुई घटना के बाद ट्रक चालक और संचालक हिमाचल के ऊपरी क्षेत्र में जाने से कतराने लगे हैं।

बिलासपुर में आंदोलनकारियों ने 14 ट्रकों में पानी डाल दिया। कुछ बैग फाड़ दिए गए। पुलिस पर भी सुरक्षा नहीं देने का आरोप है। किसी तरह चालक ट्रक लेकर नालागढ़ आए, लेकिन पानी डाला हुआ सीमेंट खराब हो गया है। अब कंपनी भी इसे लेने से इनकार कर रही है।

ट्रक संचालक कृष्ण कुमार कौशल ने बताया कि अगर सीमेंट को सरकारी कामों पर ले जाना है तो ट्रक संचालकों को सुरक्षा मुहैया करवाई जाए। यूनियन के काफी ट्रक को नुकसान हुआ है, जिसका खामियाजा ट्रक संचालकों को भुगतना पड़ रहा है। सरकार इस मामले को जल्द निपटाए। 

उधर, नालागढ़ ट्रक यूनियन के कोषाध्यक्ष वीर सिंह चंदेल ने बताया कि यूनियन ने किसी भी गाड़ी को कहीं भी जाने से नहीं रोका है, लेकिन ट्रक संचालकों के साथ हुई मारपीट और सीमेंट खराब करने के बाद कोई भी ट्रक चालक पहाड़ी क्षेत्र में जाने से डर रहे हैं।
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