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शिमला रेप केसः सीबीआई ने मामले में पकड़े गए आरोपियों को लेकर किया बड़ा खुलासा

Wed, 29 Nov 2017 01:51 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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गुड़िया दुराचार और हत्या मामले में पुलिस एसआईटी की ओर से पकड़े गए आरोपियों को लेकर सीबीआई ने बड़ा खुलासा किया है। पुलिस एसआईटी की ओर से पकड़े गए छह आरोपियों ने न तो गुडि़या से दुराचार किया और न ही उसकी हत्या। यह अहम खुलासा सीबीआई ने किया है। 
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सीबीआई सूत्रों के अनुसार लॉकअप हत्याकांड में कोर्ट को सौंपी गई चार्जशीट में इसका जिक्र है। पुलिस हिरासत में मारे गए सूरज समेत सभी छह आरोपियों को केस में झूठा फंसाया गया है। 

सीबीआई की मानें तो पुलिस ने थर्ड डिग्री टार्चर कर आरोपियों से जुर्म कबूल करवाया, जिसमें एक आरोपी सूरज की मौत हो गई। लॉकअप हत्याकांड की जांच के दौरान मिले तमाम सबूतों को सीबीआई ने इसका आधार बनाया है।
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इन टेस्ट रिपोर्ट का किया उल्लेख

जांच एजेंसी ने कोर्ट को सौंपी चार्जशीट में आरोपियों के किए नार्को, पॉलीग्राफ और ब्रेन इलेक्ट्रिकल ऑक्सिलेशन सिग्नेचर प्रोफाइल (बीईओएस) टेस्ट की रिपोर्ट का उल्लेख भी किया है। 

सीबीआई सूत्रों के अनुसार वैज्ञानिक टेस्टों ने स्पष्ट कर दिया है कि पुलिस की ओर से पकड़े गए आरोपी गुडि़या हत्याकांड में शामिल नहीं हैं। सीबीआई के इस खुलासे से अब बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि आखिर गुडि़या से रेप कर उसकी हत्या करने वाले असल गुनहगार कौन हैं। 

गुडि़या से दुराचार और हत्या के एक आरोपी सूरज की लॉकअप में हत्या के बाद मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई थी। लॉकअप हत्याकांड में सीबीआई ने विशेष कोर्ट में चार्जशीट पेश कर दी है। 

सूत्रों के मुताबिक चार्जशीट में सीबीआई ने दुराचार और हत्या करने के आरोप में गिरफ्तार किए 6 आरोपियों से जुर्म कबूल करवाने के लिए अपनाए हथकंडों का उल्लेख किया है।

पांच आरोपियों के यहां करवाए परीक्षण

जांच एजेंसी ने गुड़िया के हत्यारों और लॉकअप हत्याकांड के असल आरोपियों तक पहुंचने के लिए पांच आरोपियों राजेंद्र उर्फ राजू, सुभाष, दीपक उर्फ दीपू, सुभाष, लोकजन उर्फ छोटू और सह आरोपी आशीष चौहान का गांधीनगर गुजरात स्थित सेंट्रल फोरेंसिक साइंस लैब में परीक्षण करवाए। 

तीन तरह के टेस्ट की रिपोर्ट का विवरण सीबीआई ने चार्जशीट में दिया है। जांच के दौरान पाया कि आरोपियों को पुलिस ने बुरी तरह से पीटा और थर्ड डिग्री का टार्चर कर जुर्म कबूलने का दबाव बनाया। अगर वैज्ञानिक टेस्ट रिपोर्टों की मानी जाए तो मामला और उलझा हुआ दिख रहा है। 

हालांकि जिन्हें अभी तक आरोपी माना जा रहा है वह साफ बच रहे हैं। ऐसे में सीबीआई के गुडि़या से रेप और हत्या प्रकरण जांच पूरी होने के बाद पूरे प्रकरण से पर्दा उठेगा कि मासूम गुडि़या से दुराचार व उसके कत्ल के जुर्म को किसने और किस तरह अंजाम दिया। 

सीबीआई ने रिपोर्ट में लिखा है कि आरोपी पुलिस वाले और सूरज सिंह की हिरासत में मौत को लेकर दर्ज तथ्यों और परिस्थितियों से स्थापित होता है कि सूरज और अन्य को एफआईआर नंबर 97/2017 में झूठा फंसाया गया है।

नार्को टेस्ट की रिपोर्ट में हुआ ये खुलासा

राजेंद्र उर्फ राजू : पॉलीग्राफ टेस्ट में राजू से गुडि़या से रेप और हत्या करने से संबंधित सवाल पूछे गए। नतीजे दर्शा रहे हैं कि वह इस अपराध में शामिल नहीं था। बीईओएस टेस्ट में ये निकला कि उसे पुलिस ने टार्चर किया और उस पर जुर्म कबूलने का दबाव बनाया गया।

नार्को एनालिसेस टेस्ट में राजिंद्र ने खुलासा किया कि उसे लॉकअप में सुभाष और सूरज के साथ रखा गया था। एक दिन जब सूरज ने एक और चपाती मांगी तो पुलिस कर्मी उसे ऊपर ले गए। इसके बाद उसने सूरज को नहीं देखा। गुडि़या से संबंधित प्रकरण का उल्लेख नार्को की रिपोर्ट में नहीं किया है।

सुभाष : पॉलीग्राफ टेस्ट में सुभाष से गुडि़या प्रकरण से संबंधित सवाल पूछे गए, जिससे साफ संकेत मिले हैं कि वह इस जुर्म में शामिल नहीं है। बीईओएस रिपोर्ट में उसके गुडि़या रेप और हत्या करने के षड्यंत्र में शामिल होने की संभावनाएं नहीं हैं।

नार्को टेस्ट में उसने बताया है कि वो क्राइम सीन के पास से गुजरा जरूर था, लेकिन उसने शव तक नहीं देखा। इसके अलावा सूरज हत्याकांड का पता उसे तब लगा जब वो न्यायिक हिरासत में था।

लोकजन उर्फ छोटू : पॉलीग्राफ टेस्ट में ऐसा पाया गया कि गुडि़या रेप और हत्या को लेकर पूछे सवालों को लेकर उसके जवाब सही थे। ये संकेत है कि वह भी इस जुर्म का हिस्सा नहीं था।

बीईओएस टेस्ट में निकल कर आया कि जब जुर्म हुआ तो उस अवधि में वो अपनी बहन के घर पर था। नार्को टेस्ट में दिए बयान से पता चलता है कि छोटू ने पुलिस के टार्चर के बाद जुर्म कबूला है।

दीपक उर्फ दीपू : जांच से पता चला कि नार्को टेस्ट रिपोर्ट में दीपू का गुडि़या रेप और हत्या का कबूलनामा झूठा है। उसने पुलिस के टार्चर और धमकियों के कारण जुर्म को कबूल लिया।

ऐसे होते हैं यह टेस्ट

ब्रेन इलेक्ट्रिकल ऑक्सिलेशन सिग्नेचर प्रोफाइल : सरल भाषा में इसे ब्रेन फिंगर प्रिटिंग भी बोला जाता है। इसके तहत आरोपी से पहले पूछताछ की जाती है। इसके बाद उसे टेस्ट के बारे में समझाया जाता है। फिर आरोपी के दिमाग पर इलेक्ट्रिकल उपकरण लगाए जाते हैं।

उसे क्राइम सीन के बारे में बताया जाता है जिसके उस पर आरोप हैं। आरोपी उसके बारे में बोलता है, जिसे ये उपकरण दिमाग से निकलने वाली तरंगों के हिसाब से रिकार्ड करता है।

नार्को टेस्ट : ये एक वैज्ञानिक टेस्ट है, जिसमें आरोपी को अर्द्ध चेतन अवस्था में लाने के लिए इंजेक्शन लगाया जाता है। सोडियम पेंटोथॉल के इंजेक्शन से आरोपी उस अवस्था में चला जाता है, जिसमें उससे बातचीत की जा सके।

अर्द्धचेतन हालात में चले जाने के साथ उसकी तर्क बुद्धि भी कार्यशील नहीं रहती। इस अवस्था में आरोपी से जुर्म से जुड़े सवाल पूछे जाते हैं, जिसके वो जवाब देता है।

पॉलीग्राफ टेस्ट : इस टेस्ट से पहले आरोपी से प्रकरण का ब्योरा लिया जाता है। इसके बाद विभिन्न उपकरण उसके शरीर पर लगाए जाते हैं, जिनसे रक्तचाप, नब्ज, और सांस लेने की स्थिति को मापा जा सके। उपकरण लगाने के बाद आरोपी को समझाया जाता है कि यह उपकरण कैसे काम करेंगे।

इसके बाद मामले से जुड़े विभिन्न सवाल किए जाते हैं, जिनके उत्तर उपकरणों से मिलने वाले नतीजों से जोड़कर देखा जाता है। हर जवाब पर रक्तचाप बढ़ने, नब्ज और सांस तेज होने की स्थिति का आकलन किया जाता है।
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आईजी जैदी और एसपी पर डीजीपी को झूठी रिपोर्ट देने का आरोप

सीबीआई सूत्रों  के मुताबिक जहूर हैदर जैदी, डीडब्ल्यूडी नेगी, मनोज जोशी, राजेंद्र सिंह और अन्य ने इस मामले में आपराधिक षड्यंत्र रचा और सबूतों को तोड़-मरोड़कर पेश कर जाली केस बनाया।

इसके अलावा पुलिस रिकार्ड में गलत एंट्री की। डीजीपी को झूठी और गलत रिपोर्ट दी गई कि सूरज सिंह की हत्या राजेंद्र सिंह उर्फ राजू ने की है और यह पुलिस लॉकअप में हुई। 
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