शिमला। ठियोग में अगस्त 2020 में चिट्टे की ओवरडोज मामले में जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड (जेजेबी) शिमला ने दो किशोरों को गैर-इरादतन हत्या (धारा 304) और साक्ष्य मिटाने के आरोपों से बरी कर दिया है। बोर्ड की प्रधान मजिस्ट्रेट प्रतिभा नेगी, सदस्य प्रियंका खनाल और निरंजना कंवर की पीठ ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि अभियोजन पक्ष दोनों किशोरों के खिलाफ परिस्थितियों की कड़ी को साबित करने और संदेह से परे दोष सिद्ध करने में पूरी तरह नाकाम रहा है। पुलिस थाना ठियोग में 9 अगस्त 2020 को दर्ज एफआईआर के अनुसार, शिकायतकर्ता ने शिकायत दर्ज करवाई थी कि उनका 18 वर्षीय बेटा 7 अगस्त को अपने दोस्तों (नाबालिगों) के पास गया था। 8 अगस्त दोपहर के बाद उसका फोन बंद हो गया और 9 अगस्त की सुबह ठियोग की हिमुडा कॉलोनी के पास उसका शव बरामद मिला। मृतक की जेब से चिट्टे का प्लास्टिक सिरिंज मिला था। परिजनों ने आरोप लगाया था कि उनके बेटे को दोनों नाबालिगों और एक अन्य साथी ने चिट्टे की ओवरडोज देकर मार डाला। संवाद