गनीमत यह रही कि कार के सामने पत्थर को आता देख चालक ने ब्रेक लगा दी। वहीं इससे पहले गुजरी गाड़ी रफ्तार से आगे निकल गई। परवाणू से सोलन तक हाईवे के पास पहाड़ी पर बने दर्जनों घरों को बारिश के चलते खतरा हो गया है, क्योंकि यहां पानी की निकासी का प्रावधान नहीं किया गया है। उधर, मंडी-पठानकोट एनएच पर चक्की खड्ड के बहाव से पुल के पिलरों को नुकसान हुआ है, वहीं पुल की सुरक्षा के लिए लगाई गई सुरक्षा दीवार और क्रेट बह गई। उधर, मनाली-चंडीगढ़ फोरलेन में मंडी से पंडोह के बीच छह मील व सात मील में भूस्खलन हो रहा है। यहां भूस्खलन से एनएच घंटों बाधित हो रहा है
कालका-शिमला रेल ट्रैक भी मलबा गिरने से रहा बाधित
उधर, कालका-शिमला रेल ट्रैक पर भी बार-बार मलबा गिरने से ट्रेनों को आवाजाही बाधित हो रही है। शुक्रवार को भी इस सेक्शन में चलने वाली दो ट्रेनें देरी से कालका रेलवे स्टेशन पहुंचीं। इसके चलते करीब दो घंटे ट्रेनों की आवाजाही नहीं हो सकी। अधिकतर मलबा धर्मपुर और सनवारा रेलवे स्टेशन के बीच में आ रहा है।
उफान पर नदी और नाले, सरकार ने मौसम को भांप कर ही यात्रा करने की दी सलाह
ब्यास और सतलुज नदियों सहित अन्य नदी-नाले पूरे उफान पर हैं। सरकार ने लोगों से मौसम को भांप कर ही यात्रा करने की सलाह दी है। पर्यटकों को विशेषकर नदी और नालों से दूरी बनाए रखने के लिए कहा है।
भूस्खलन के बाद रुक जाती है आवाजाही
पहाड़ियों से मलबा और पत्थर आने के बाद कालका-शिमला फोरलेन पर आवाजाही थम जाती है। मलबे को हटाने के बाद ही आवाजाही सुचारू होती है।
किरतपुर-मनाली फोरलेन भी भूस्खलन से घंटों हो रहा बाधित
किरतपुर-मनाली फोरलेन में मंडी से पंडोह के बीच छह मील व सात मील में भूस्खलन हो रहा है। यहां भूस्खलन से एनएच घंटों बाधित हो रहा है। पूर्व में यहां भूस्खलन से कुल्लू घाटी का संपर्क कट गया था। वैकल्पिक मार्ग में भी भूस्खलन से अब दिक्कतें बढ़ गई हैं।