अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए विख्यात शांघड में यह सब करने का मतलब देव नियमों का उल्लंघन माना जाता है। देव आदेशानुसार शांघड शंगचुल महादेव का सुरक्षित क्षेत्र है। इसे देवता ने देऊघरा नाम दिया है। परंपरा है कि यहां कोई किसी को तंग न करें, ऊंची जुबान से न बोले। यहां पर कोई पाप व स्वार्थ न हो। कोई पेडों की डाली तक न काटी जाए। पुलिस इस क्षेत्र में वर्दी पहन कर न आए और न ही यहां कोई भौंऊंरू लामण बोल सकते हैं। इस प्रकार की आज भी यहां देव प्रथा चल रही है। देवता के कारकून दवेंद्र शर्मा, रेवती राम पालसरा और बेलीराम राणा ने बताया कि शांघड आपसी भाईचारे की मिसाल है। लोग जागरूक है और लड़ाई-झगड़ों से दूर रहते हैं। लोग अपनी जिम्मेदारी स्वयं समझते हैं। नियमों का उलंघन करने वालों के लिए जुर्माने का भी प्रावधान है। यहां अब पर्यटकों की आवाजाही तेज होने लगी है। देवता कमेटी ने बाहर से आने वाले लोगों को भी इन नियमों का अनुसरण करने की हिदायत जारी कर रखी है।
गांव में चलती है गांधीगिरी
गांव में गांधीगिरी का पाठ जन्म लेते ही पढ़ाया जाता है। करीब 1,000 आबादी वाले इस गांव की सीमा के अंदर झगड़ा करना निषेध है। गाली-गलौच करना यहां पाप और चोरी करना महापाप माना जाता है। यहां के इष्ट देवता शंगचूल महादेव का इतिहास महाभारत काल से जुड़ा है। गांव में आज भी पांडव कालीन ऐतिहासिक धरोहरें मिलती हैं। शंगचूल महादेव का विशाल मैदान करीब 228 बीघा में फैला हुआ है।
सुंदर मंदिर से मिली क्षेत्र को नई पहचान
शांघड में देवता शंगचुल महादेव का मंदिर हजारों लोगों की श्रद्धा का केंद्र बन गया है। सात वर्ष पहले देवता का पुराना मंदिर आग की भेंट चढ़ गया था। एक साल के भीतर दोबारा भव्य मंदिर का निर्माण किया गया है। रोजाना श्रद्धालु देवता के मंदिर के दर्शनों के लिए दूर-दूर से शांघड पहुंच रहे हैं। शांघड के युवा अब ग्रामीण पर्यटन की नई इबारत लिख रहे हैं।