हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य के मेडिकल कॉलेजों में चिकित्सकों की प्रतिनियुक्ति पर रोक लगा दी है। अदालत ने सरकार की प्रतिनियुक्ति योजना को प्रथम दृष्टया गलत ठहराया है। अदालत ने स्वास्थ्य सचिव सहित चिकित्सा शिक्षा के निदेशक और टांडा मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। मामले की सुनवाई 24 अगस्त को निर्धारित की गई है। डॉक्टर अमित गुप्ता और अन्य की ओर से सरकार की प्रतिनियुक्ति योजना को हाईकोर्ट के समक्ष चुनौती दी गई है। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने सरकार की इस प्रतिनियुक्ति योजना को सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के विपरीत पाया है।
याचिका में आरोप लगाया है कि सरकार की ओर से टांडा मेडिकल कॉलेज और इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज शिमला में कार्यरत चिकित्सकों को प्रतिनियुक्ति आधार पर नए मेडिकल कॉलेजों में तैनात किया जा रहा है। इसके लिए चिकित्सकों से न तो कोई सहमति ली जा रही है और न ही प्रतिनियुक्ति से खाली पड़े पदों को भरा जा रहा है। याचिका के माध्यम से अदालत को बताया गया कि 7 जून, 2008 को सरकार ने टांडा मेडिकल काॅलेज और इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज शिमला के शैक्षणिक संवर्ग (कैडर) को अलग-अलग किया था।
याचिकाकर्ता टांडा मेडिकल कॉलेज के शैक्षणिक संवर्ग में समायोजित हो गए। उसके बाद 17 नवंबर, 2018 को सरकार ने चार नए मेडिकल काॅलेज खोले। सरकार ने इन कॉलेजों में शैक्षणिक संवर्ग के पद भरने के लिए योजना बनाई कि जब तक इन पदों को नियमित तौर पर नहीं भरा जाता, तब तक टांडा और शिमला में कार्यरत चिकित्सकों को प्रतिनियुक्ति आधार पर नए मेडिकल काॅलेजों में तैनात किया जाए। अदालत को बताया गया कि 5 मई, 2022 को भी प्रतिनियुक्ति पर किए तबादला आदेशों को हाईकोर्ट के समक्ष चुनौती दी थी।
उस समय सरकार ने चंबा मेडिकल कॉलेज में विभिन्न पद भरने के लिए टांडा से प्रतिनियुक्ति आधार पर स्थानांतरण किया था। अदालत को बताया गया कि सरकार के आश्वासन के बाद इस याचिका को बंद कर दिया गया था। सरकार ने आश्वासन दिया था कि प्रतिनियुक्ति सिर्फ नियमित भर्ती तक ही सीमित रहेगी। याचिका में आरोप लगाया गया कि इसके बावजूद सरकार ने 9 जून, 2023 को दोबारा से चंबा मेडिकल काॅलेज में प्रतिनियुक्ति के आदेश पारित कर दिए। याचिकाकर्ता ने अदालत से गुहार लगाई है कि सरकार की प्रतिनियुक्ति योजना रद्द की जाए।