शिमला। हिमाचल प्रदेश में पांडव सर्किट के विकास के जरिये सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और स्थानीय कारोबारियों की आजीविका के अवसर बढ़ाने की दिशा में शोध किया जा रहा है। यह शोध हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू) के पर्यटन एवं आतिथ्य प्रबंधन संस्थान कर रहा है। इस परियोजना के तहत वास्तुकला एवं विरासत संरक्षण विशेषज्ञ की नियुक्ति की प्रक्रिया चल रही है। इसके लिए संबंधित विषय में स्नातकोत्तर योग्यता रखने वाले अभ्यर्थियों से 31 अक्तूबर तक आवेदन मांगे हैं। चयनित सलाहकार को 37 हजार रुपये मासिक मानदेय दिया जाएगा। साक्षात्कार 10 नवंबर को आयोजित किया जाएगा। इस परियोजना के माध्यम से सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और स्थानीय आजीविका के बीच संबंधों का अध्ययन किया जाएगा। पांच वर्षीय परियोजना का संचालन प्रोफेसर नितिन व्यास कर रहे हैं। संवाद