शिमला। आईजीएमसी परिसर में जूस दुकान पर कब्जा जमाए रखने की कोशिश कर रहे संचालक को अदालत से बड़ा झटका दिया है। अतिरिक्त जिला न्यायाधीश सीबीआई कोर्ट शिमला डॉ. परविंदर सिंह अरोड़ा की अदालत ने इस मामले में निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए अपीलकर्ता की रोगी कल्याण समिति के खिलाफ दायर याचिका को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी दुकान खाली न करने से सरकारी खजाने को वित्तीय नुकसान हो रहा है। अपीलकर्ता अनिल कुमार शर्मा निवासी लक्कड़ बाजार को साल 1996 में आईजीएमसी परिसर में एक छोटी दुकान आवंटित की गई थी। बाद में पार्किंग निर्माण के चलते उन्हें 2013 में 10 वर्ष लीज पर प्रिंसिपल ऑफिस के पास एक वैकल्पिक दुकान आवंटित की जिसका किराया 3000 रुपये प्रति माह तय हुआ था। इस लीज को बाद में 31 जुलाई 2024 तक के लिए बढ़ाया था। इसके बाद रोगी कल्याण समिति ने इस दुकान के लिए नए सिरे से ई-टेंडर आमंत्रित किए थे। इस टेंडर प्रक्रिया में यह दुकान राम लाल नामक व्यक्ति को 84,745 रुपये प्रति माह के उच्चतम किराये पर आवंटित की थी। समिति ने अनिल कुमार शर्मा को दुकान खाली करने के नोटिस जारी किए थे। संवाद