बरसात के मौसम हुई भारी बारिश ने इस बार लोगों को कभी भूलने वाले जख्म दिए हैं। लोगों की आंखों के सामने उनके घर ताश के पत्तों की ढह गए लेकिन वह चाहकर भी कुछ नहीं कर पाए। गनीमत यह रही कि प्रशासन ने खतरे को भांपते हुए पहले ही मकानों, और कार्यालयों को खाली करवा दिया था। इससे बड़ा हादसा होने से टल गया लेकिन जितनी बड़ी संख्या में एक साथ कई मकान ढह गए, उससे आनी के लोग बुरी तरह से सहमे हुए हैं। वहीं अब भूस्खलन के बाद यहां कई और मकान असुरक्षित हो गए हैं। प्रशासन ने करीब 23 मकानों को असुरक्षित घोषित कर खाली करने के नोटिस जारी कर दिए हैं। इससे लोगों की रातों की नींद हराम हो गई है। लोगों ने पाई-पाई जोड़कर अपने सपनों का महल तैयार किया था लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं सोचा था कि तिनके की तरह एक दिन उनकी जीवन भर की कमाई जमींदोज हो जाएंगी। नए बस स्टैंड क्षेत्र की ओर आनी बाजार का विस्तार हो गया था, जो आनी की शान थी लेकिन इस आपदा ने सबकुछ बर्बाद कर दिया।
आठ मकान जहां धराशाही हो गए हैं वहीं दो मकानों को भारी नुकसान पहुंचा है। इसके अलावा करीब दो दर्जन मकानोें को डेंजर जोन में घोषित कर दिया गया है। ऐसे में बाजार का एक बहुत बड़ा हिस्सा बर्बादी के कगार पर पहुंच गया। वहीं किरण बाजार, पुराना अस्पताल भवन और वीवीआईपी क्षेत्र का कोर्ट रोड भी सुरक्षित नहीं है। पूर्व में देहुरी खड्ड और भैरड़ नाले ने नाले के आसपास के मकानों को भारी क्षति पहुंचाई है। ऐसे में आनी कस्बे के हुए नुकसान पर हर कोई अपनी-आनी राय रख रहा है। वहीं भविष्य में इस तरह की आपदाएं फिर से पेश न आए, यह भी प्रशासन के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है। आनी में हुए आपदा की बात करें तो इसके लिए बेतरतीब निर्माण और अतिक्रमण भी जिम्मेदार है। वहीं कई मकान तो ऐसे बने हैं, जहां न कोई ड्रेनेज सिस्टम है न कोई रास्ता है। लगातार हो रहे भूस्खलन से पुराना अस्पताल भवन खतरे की जद में आ गया है वहीं मेला मैदान से सारा पानी किरण बाजार तक पहुंच रहा है। इससे किरण बाजार पर भी संकट के बादल मंडरा रहे हैं। उचित निकासी नहीं होने से पानी जमीन में रिसता रहा और भारी बारिश से जमीन खिसक गई, जिससे यह तबाही हुई।