शिमला। राजधानी में सहकारिता बैंक से जुड़े धोखाधड़ी और जालसाजी के मामले में अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट नंबर-एक प्रतिभा नेगी ने मुख्य आरोपी कुलवंत सिंह, भोम राज गुप्ता और कृष्न गुप्ता को तमाम आरोपों से बरी कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ लगाए जुर्म को संदेह से परे साबित करने में पूरी तरह असफल रहा है। यह मामला वर्ष 2012 का है जब हिमाचल प्रदेश राज्य सहकारी बैंक लिमिटेड की शोघी शाखा के माध्यम से यह शिकायत दर्ज करवाई थी कि आरोपियों ने वर्ष 2007 में दो-दो लाख रुपये का व्यक्तिगत ऋण लिया था। इस ऋण के एवज में सिविल सप्लाई कॉर्पोरेशन में कार्यरत आरोपी कुलवंत सिंह ने इसमें गारंटी ली थी। बाद में कर्जदारों ने ऋण नहीं चुकाया तो बैंक ने गारंटर के वेतन से कटौती के लिए संबंधित कार्यालय से संपर्क किया। इस पर खुलासा हुआ कि ऐसा कोई भी अंडरटेकिंग कार्यालय द्वारा जारी नहीं किया था और उस पर मौजूद हस्ताक्षर तथा मुहर फर्जी थे। अदालत ने पाया कि पुलिस और अभियोजन पक्ष अदालत के समक्ष ऐसा कोई ठोस प्रत्यक्ष साक्ष्य पेश नहीं कर सका जो यह साबित कर सके कि आरोपियों ने धोखाधड़ी की नीयत से जाली दस्तावेज तैयार किए। संवाद