शिमला। अदालत ने पंथाघाटी स्थित आईजीएमसी डॉक्टर्स को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसायटी से जुड़े पर्यावरण नियमों के उल्लंघन के एक दशक पुराने मामले में सोसायटी के पदाधिकारियों और ठेकेदारों को बड़ी राहत दी है। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी मनु प्रिंजा की अदालत ने राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से दायर शिकायत को खारिज कर सोसायटी उसके तत्कालीन अध्यक्ष डॉ. श्याम कौशिक, सचिव डॉ. राजेश कश्यप और दो ठेकेदारों को सभी आरोपों से दोषमुक्त (डिस्चार्ज) कर दिया है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने वर्ष 2016 में पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम 1986 और जल (प्रदूषण निवारण तथा नियंत्रण) अधिनियम, 1974 के तहत यह मामला दर्ज कराया था। बोर्ड का आरोप था कि सोसायटी ने पंथाघाटी में 20,000 वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्र में आवासीय परियोजना का निर्माण बिना किसी पूर्व पर्यावरण मंजूरी (ईआईए क्लीयरेंस) और बोर्ड की अनुमति के शुरू किया। इसके अलावा मलबे के निस्तारण, सीवरेज, ग्रीन एरिया और अन्य सुरक्षा मानकों की अनदेखी के आरोप भी लगाए थे।