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Shimla News: खाद्य मिलावट 14 साल पुराने मामले में सभी आरोपी बरी

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शिमला। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट नंबर एक प्रतिभा नेगी की अदालत ने प्रिवेंशन ऑफ फूड एडल्ट्रेशन एक्ट के तहत चल रहे 14 साल पुराने मामले में फैसला सुनाते हुए सभी आरोपियों को बरी कर दिया है। अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ लगाए आरोपों को संदेह से परे साबित करने में विफल रहा है। यह मामला 29 अप्रैल 2011 का है जब शिमला नगर निगम क्षेत्र के तत्कालीन फूड इंस्पेक्टर अशोक मंगला ने रिज सिनेमा के पास स्थित मैसर्स राम सुफल दुकान नंबर-एक का निरीक्षण किया था। दुकान का संचालन कर रहे राधेश्याम के पास बिक्री के लिए रखे फ्रूट जेएल फिल्ड टॉइज (फ्रूट जेली) के पैकेटों के संदेह के आधार पर नमूने लिए। पब्लिक एनालिस्ट कंडाघाट की जांच रिपोर्ट में इस फ्रूट जेली में टोटल घुलनशील ठोस पदार्थ निर्धारित मानक 65 फीसदी के मुकाबले मात्र 16 फीसदी पाए गए थे। इसके आधार पर इसे मिलावटी घोषित किया था। खाद्य सुरक्षा अधिकारी ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी शिमला से अनुमति लेकर नवंबर 2011 में अदालत में शिकायत दर्ज कराई। लंबी चली कानूनी प्रक्रिया के दौरान धारा 20-ए के तहत इस मामले में डिस्ट्रीब्यूटर मैसर्स अग्रवाल एजेंसियां संजौली और मैसर्स गुप्ता सेल कॉर्पोरेशन सोलन के नाम भी बतौर आरोपी जोड़े गए थे। संवाद
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