शिमला। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी शिमला मनु प्रिंजा की अदालत ने वर्ष 2013 में ऊर्जा निदेशालय के कार्यालय में लगी आग के मामले में पूर्व ड्राइवर महमूद चौहान को बरी कर दिया है। अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ लापरवाही से आग लगाने या सरकारी फाइलें और संपत्ति नष्ट करने के आरोपों को संदेह से परे साबित करने में पूरी तरह से विफल रहा है। मामला 31 दिसंबर 2013 की रात का है जब न्यू शिमला स्थित ऊर्जा निदेशालय के कार्यालय में न्यू ईयर की पार्टी के दौरान आग लग गई थी। अभियोजन पक्ष के अनुसार सिगरेट की पसंद को लेकर हुए विवाद के बाद आरोपी महमूद चौहान ने गुस्से में जलता हुआ हीटर सुरक्षा गार्ड के बिस्तर पर फेंक दिया और बाद में कार्यालय के केबिनों में हीटर से फाइलें और फर्नीचर जला दिए। एक जनवरी 2014 को पुलिस स्टेशन न्यू शिमला में एफआईआर दर्ज की गई थी। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि बिना ठोस सबूतों और साक्ष्यों की अटूट श्रृंखला के किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। संवाद