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झोटों की लड़ाई में विधायक, डीसी और एसपी पहुंचे हाईकोर्ट

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अमर उजाला ब्यूरो
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शिमला। हाईकोर्ट के समक्ष मशोबरा के सायर मेले में मेला कमेटी की ओर से सुप्रीम कोर्ट के आदेशों और कायदे कानूनों को ताक पर रखकर झोटों की लड़ाई करवाने के मामले पर सुनवाई हुई। कोर्ट में मामले पर सुनवाई के समय कसुम्पटी विधानसभा क्षेत्र के विधायक अनिरुद्ध सिंह सहित डीसी और एसपी शिमला उपस्थित रहे। इन प्रतिवादियों ने शपथ पत्र के माध्यम से बताया कि वे यह सुनिश्चित करेंगे कि सायर मेले के दौरान आइंदा कानून के विरुद्ध झोटों की लड़ाई का आयोजन नहीं होगा। कसुम्पटी निवासी सुनील मोहन जेटली द्वारा हाईकोर्ट के नाम लिखे पत्र पर संज्ञान लेते हुए कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय करोल और न्यायाधीश संदीप शर्मा की खंडपीठ ने यह आदेश पारित किए। मामले के अनुसार गत 16 सितंबर को मशोबरा से करीब दो किमी दूर तलाई स्थित माता भद्रकाली के प्रांगण में झोटे लड़वाए गए थे। सुप्रीम कोर्ट के पशु करूरता को रोकने को जारी आदेशों के बाद इस मेले में तीन साल से झोटों की लड़ाई बंद थी। प्रार्थी ने एमएलए अनिरुद्ध सिंह को ऐसे गैरकानूनी कार्यक्रम में भाग लेने और सायर मेला कमेटी के सभी पदाधिकारियों को झोटों की लड़ाई का आयोजन करवाने भगाली के बलदेव, घनाहट्टी के अमर सिंह, दहली से परस राम, शालाघाट से मस्त राम, निन से देवी राम व अन्य वे लोग जो मेले में अपने अपने झोटे लाए थे तथा वहां पर मौजूद सभी पुलिस वालों और सरकारी अधिकारियों जो मौके पर मूक दर्शक बने हुए थे, उनके खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है। प्रार्थी ने सबूत के तौर पर समाचार पत्रों में छपी खबरों की कटिंग तथा सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की प्रति भी कोर्ट के ध्यानार्थ अपने पत्र के साथ लगाई है। जिलाधीश शिमला के वक्तव्य के पश्चात इस मामले में भद्र काली माता मंदिर मंदिर कमेटी के प्रधान बालक राम वर्मा, सचिव मोहन सिंह, उपाध्यक्ष जेएस कंवर, सदस्य बाल कृष्ण, बिहारी लाल, हीम पाल, मेहर सिंह, सपा तुंगा नेगी, चंद्र सिंह, कुलवंत सिंह, भगत राम, पुजारी पूर्ण शर्मा और कोषाध्यक्ष हरि कृष्ण को प्रतिवादी बनाया गया था। इन प्रतिवादियों ने कोर्ट को बताया कि जिलाधीश शिमला ने उनका नाम इस मामले में घसीट कर गैर जिम्मेदाराना भूमिका निभाई जबकि तथ्य यह है कि उन्होंने एक सप्ताह पहले ही प्रशासन को आगाह कर दिया था कि मेले के दौरान इस तरह की अवैध गतिविधियां हो सकती हैं। कोर्ट ने मामले का निपटारा करते हुए कहा कि आइंदा कानून और अदालत के आदेशों की अवहेलना नहीं होनी चाहिए। जिलाधीश और पुलिस अधीक्षक शिमला को अपनी जिम्मेवारी समझते हुए कानून के राज को स्थापित करने में अपनी भूमिका निभानी चाहिए।
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