शिमला। सीपीआईएम की शिमला शहरी कमेटी ने वीरवार को एनजीटी के निर्णय के खिलाफ उपायुक्त कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में माकपा राज्य सचिवालय सदस्य और पूर्व महापौर संजय चौहान ने कहा कि राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) के इस निर्णय से प्रदेश सरकार, नगर निगम जैसी लोकतांत्रिक संस्थाओं को विश्वास में न लेकर उनसे कोई भी राय नहीं ली गई। वहीं, इस आदेश को लागू करवाने के लिए जो मानीटरिंग कमेटी बनाई गई थी। उसमें भी अधिकतर सदस्य प्रदेश और शिमला शहर के शामिल नहीं थे। राज्य कमेटी सदस्य विजेंद्र मेहरा ने कहा कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के इस फैसले के अनुसार घरेलू भवनों को नियमित करने के लिए पांच हजार वर्ग फुट और कामर्शियल भवन को नियमित कराने के लिए दस हजार प्रति वर्ग फुट देने होंगे। वहीं, पूरे भवन को रेगुलर करवाने के लिए 50 लाख से अधिक रुपये देने पड़ सकते हैं। शिमला शहरी कमेटी के सचिव बलबीर पराशर ने कहा कि यह निर्णय जनता के लिए तानाशाही साबित हो रहा है। इसके अलावा स्मार्ट सिटी के लिए भी खतरा पैदा हो गया है। इसके अलावा शहर के कोर एरिया में भवन पर प्रतिबंध लगाया दिया है। जबकि, सदस्य किशोरी ढटवालिया ने प्रदर्शन में कहा कि शिमला प्लानिंग एरिया में भी इसका खासा असर हुआ है। प्रदर्शन के दौरान माकपा ने कहा कि प्रदेश सरकार इस निर्णय के खिलाफ कानूनी कार्रवाई लड़े। इस दौरान संजय चौहान, विजेंद्र मेहरा, किशोरी ढडवालिया, बलबीर पराशर, बाबूराम, सोनिया सब्रवाल, आशु भारती, जगमोहन ठाकुर, विनोद विरसांटा, पवन शर्मा, दिनित देंटा, आशु भारती, रमन थारटा, जीवन, मोनिका, पंकज, जगदेव, कपिल नेगी, रविंद्र समेत तीन सौ से अधिक कार्यकर्ता मौजूद रहे।