विवेक शर्मा
गगरेट(ऊना)।
प्रदेश में चुनावी सीजन शुरू होते ही वोटरों की बल्ले-बल्ले हो गई है। पांच साल के बाद प्रदेश में आए चुनावी महाकुंभ में हर कोई बढ़-चढ़ भाग लेकर अपने अपने दल के चहेते नेताओं की जीत सुनिश्चित कराने के लिए लगा है। हालांकि कुछ लोगों के लिए यह चुनावी संग्राम किसी उत्सव से कम नहीं है। उनके लिए किसी की भी जीत-हार कोई मायने नहीं रखती। इस चुनावी बेला में उनका मुख्य उद्देश्य मात्र खाओ पियो और मौज उड़ाओ है। इस समय कुछ लोगों पर साइयां साढ़े नाल, बधाइयां किते होर वाली कहावत चरितार्थ हो रही है। कारण यह कि दोपहर होते-होते उनका जुगाड़ किसी दल के नेता के साथ फिट हो जाता है। रात तक दूसरे दल के नेता के करीबी उसे खुश रखने के लिए बढ़िया खातिरदारी कर देते हैं और शराब के सहारे उनके मन की बात उजागर करने का प्रयास करते हैं। आजकल एक तबका शराब और टंगड़ी कबाब के खूब मजे ले रहा है। कुछ तो अगले कुछ माह का कोटा इकट्ठा कर बहती गंगा में केवल हाथ ही नहीं पूरी तरह नहाना चाहते हैं। सभी राजनीतिक दल अपनी गोटियां फिट करने के लिए साम, दाम, दंड, भेद की नीति अपना कर सभी वोटरों को अपने पक्ष में करने के लिए लालायित हैं। अभी चुनावी सीजन शुरू हुआ है। आगामी तीन चार दिनों के बाद यह सीजन अपने पूरे यौवन पर होगा। रूठों को मनाने और लोगों को बहलाने की कवायद तो चलती ही रहेगी। यह बात भी तय है कि आज का पढ़ा लिखा वोटर बहुत समझदार है। किसी प्रलोभन के चंगुल में शायद ही फंसे। फिलहाल सोनपरी के दीवानों की पौ बारह है। अभी उनका अंदाजा लगाना टेढ़ी खीर है कि आखिर में वह किसके पक्ष में होंगे।