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फोन टैपिंग मामला, नेता-अफसरों में लिंक की तलाश

Mon, 18 Feb 2013 01:36 PM IST
शिमला/ब्यूरो
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फोन टैपिंग मामले में फोरेंसिक रिपोर्ट की सूची की स्क्रूटनी चल रही है। इसमें शामिल फोन नंबरों में से वे अलग किए जा रहे हैं, जिन्हें टैप करने के लिए ऑन फाइल कोई मंजूरी नहीं है। ऐसे फोन नंबरों में से ही नेता और अफसरों के बीच लिंक की तलाश है।
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फोन मॉनीटरिंग की सामान्य प्रक्रिया के अनुसार जांच एजेंसियां या जांच अधिकारी नोडल ऑफिसर को ट्रैक किए जाने वाले नंबर देते हैं। इस पर नोडल अधिकारी गृह सचिव से मंजूरी लेता है और फिर ये नंबर टेक्निकल सेल को जाते हैं, ताकि इन्हें टैप किया जा सके।

सूत्रों के अनुसार इसी प्रक्रिया में अब छंटनी ये हो रही है कि कौन से फोन नंबर बिना मंजूरी के टैप किए गए और इन्हें रिकॉर्ड करने का मकसद क्या था? इसी कड़ी में सभी संबंधित फाइलों की स्क्रीनिंग भी हो रही है, ताकि नोटिंग में रेफरेंस मिले कि किस मंत्री या नेता के कहने पर यह सब हो रहा था?  
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इधर, गृह विभाग के सूत्र भी बता रहे हैं कि फोरेंसिक लैब जुन्गा ने अभी केवल सीआईडी के कंप्यूटरों की हार्ड डिस्क पर आधारित अपनी रिपोर्ट दी है। विजिलेंस से उठाए गए कंप्यूटरों की रिपोर्ट अभी आनी है। लैब ने इसके लिए दो सप्ताह का वक्त मांगा है।

यह रिपोर्ट आने के बाद ही इस बारे में कोई कार्रवाई होगी। इधर, मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह रविवार शाम 6.30 बजे शिमला पहुंच गए हैं। संभावना है कि मुख्य सचिव सुदृप्य राय सोमवार को खुद उन्हें इस मसले पर सारी अपडेट देंगे। गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव प्रेम कुमार ने पुष्टि की कि रविवार को फोरेंसिक रिपोर्ट मुख्यमंत्री को नहीं दी गई।
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