हिमाचल आने वाले सैलानियों को गांव तक पहुंचाने के लिए हर जिले के दो गांव को चयनित कर पर्यटन सर्किट विकसित किया जाएगा। नए पर्यटन स्थलों तक सैलानियों को पहुंचाने के प्रयास होंगे। मुख्य सचिव एस राय ने विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक के बाद प्रेसवार्ता में कहा कि मार्च 2014 तक प्रदेश में 75 नए पार्किंग स्थल और 40 शौचालय बनाए जाएंगे।
प्रदेश में सैलानियों की सुरक्षा के लिए हर पर्यटन स्थल पर हाई मास्क लाइटें लगाई जाएंगी। सड़कों को मजबूत बनाने और बेहतर आधारभूत ढांचा बनाने के लिए योजना तैयार होगी। केंद्र सरकार कुछ शर्तों को पूरा करने के बाद वित्तीय सहायता देने के लिए तैयार है। प्रदेश ने अधिकतर शर्तों को पूरा कर लिया है। अब केंद्र से और वित्तीय मदद मिलने की उम्मीद बढ़ गई है।
86 करोड़ रुपये खर्चने का प्रमाणपत्र केंद्र को 31 से पहले भेजा जाएगा। केंद्र ने 34 करोड़ की अतिरिक्त राशि भी जारी की है। मनाली, कुफरी, रोहतांग से सैलानियों की दिशा को बदल कर अन्य स्थलों पर पहुंचाने के लिए प्रयास किए जाएंगे। मुख्य सचिव ने दावा किया कि प्रदेश में अधिकतर होटल फुल हैं। कश्मीर में एक दुर्घटना होने के बाद से हिमाचल में सैलानियों की संख्या काफी बढ़ गई है।
उन्होंने माना कि क्षमता से ज्यादा सैलानी पहुंचने के कारण कुछ स्थलों की स्थिति खराब है, लेकिन रोजगार और अन्य मसलों के जुड़े होने के कारण कोई कडे़ फैसले नहीं लिए जा सकते हैं। मसरूर को पर्यटन स्थल बनाने के लिए कांगड़ा के रेल नेटवर्क का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसका पूरा पैकेज तैयार करने की योजना तैयार की जाएगी।
एयर इंडिया की अंदरूनी लड़ाई का असर
मुख्य सचिव ने बताया कि एयर इंडिया हिमाचल को उड़ाने भेजने को तैयार है, लेकिन उनके पायलटों के बीच चली लड़ाई के चलते योजना सिरे नहीं चढ़ रही है। 14 को दिल्ली में कुल्लू के हवाई अड्डे के विस्तार को लेकर बैठक है। इसमें हिमाचल की लिए उड़ाने भरने की मांग पर भी चर्चा संभावित है।
सैलानियों को तिब्बत दिखाएंगे
सैलानियों को बॉर्डर एरिया से तिब्बत को देखने का मौका भी मिल सकेगा। सेना के साथ मिलकर स्थानीय प्रशासन बॉर्डर एरिया पर आधारभूत ढांचा विकसित करेगा। सेना के अधिकारियों के माध्यम से पता चला है कि हिमाचल बॉर्डर एरिया पर सेना के साथ मिलकर आधारभूत ढांचा विकसित कर सकता है। किन्नौर के दूरदराज क्षेत्रों में हिमाचल आने वाले सैलानियों को पहुंचाने के लिए आधारभूत ढांचा विकसित किया जाएगा। चीन पहले ही सीमा पर आधारभूत ढांचा विकसित कर सैलानियों को यह सुविधा दे रहा है। किन्नौर जिले के दूरदराज के क्षेत्रों की सीमाएं तिब्बत के साथ लगती हैं।