शिमला। आईजीएमसी में डेढ़ सौ करोड़ की लागत से बनने वाले सुपर स्पेशलिटी ब्लॉक पर पेंच फंस गया है। केंद्र सरकार ने ग्यारह महकमों की सुपर स्पेशलिटी एक ही ब्लॉक में बनाने के लिए यह धन राशि जारी की है। प्रोजेक्ट के लिए पर्याप्त जमीन न होने के कारण बात आगे नहीं बढ़ पा रही है। हालांकि, आईजीएमसी ने बीच का रास्ता निकालते हुए 11 की जगह 9 विभागों का प्रस्ताव भेजा है। इसके पीछे प्रबंधन का दावा है कि जगह की कमी के कारण नौ विभाग ही इस ब्लॉक में खुल पाएंगे। यहां कार्डियोलॉजी और सीटीवीएस विभाग लाने की जरूरत नहीं है, यह अस्पताल के पुराने भवन में ही रहेंगे। ब्लॉक के भवन निर्माण का जिम्मा एक निजी कंपनी को सौंपा गया है। कंपनी ने भवन की ड्राइंग आईजीएमसी को भेज दी है। प्रबंधन ने कंपनी को अपनी योजनाओं के बारे में जानकारी दी है। इसमें एक बात पर जोर दिया गया है कि जिस पुराने भवन को तोड़कर ब्लॉक का निर्माण किया जा रहा है। वह अस्पताल के पुराने भवन के साथ कनेक्ट हो, ताकि मरीजों को कोई परेशानी का सामना न करना पड़े।
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सुपर स्पेशिलिटी ब्लाक में यह विभाग होंगे शिफ्ट
केंद्र से मंजूर हुए सुपर स्पेशलिटी ब्लॉक में न्यूरोलॉजी, न्यूरोसर्जरी पीडियाट्रिक सर्जरी ईएनटी, ऑर्थोपीडिक्स बर्न एंड प्लास्टिक सर्जरी ऑनकोलॉजी, नेफरोलॉजी, एंडोक्राइनोलॉजी जैसे विभागों को शिफ्ट किया जाएगा। कार्डियोलॉजी और सीटीवीएस विभाग का विस्तारीकरण पहले के ब्लॉक में ही होगा।
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30 करोड़ राज्य सरकार को देने होंगे
केंद्र की आर्थिक मामलों की कैबिनेट कमेटी ने प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सेवा योजना पीएमएसएस के जरिये प्रदेश में सुपर स्पेशलिटी ब्लॉक बनाने के लिए 150 करोड़ का बजट मंजूर किया है। इसके निर्माण में 120 करोड़ रुपए केंद्र सरकार देगी और 30 करोड़ राज्य सरकार को वहन करने होंगे।
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200 बिस्तरों की मिलेगी सुविधा
भवन निर्माण का काम एचएससी कंपनी को दिया गया है। कंपनी ने भवन निर्माण का नक्शा तैयार कर आईजीएमीसी को सौंपा है। इसमें कंपनी ने सुपर स्पेशलिटी ब्लाक में 270 बिस्तर की सुविधा देने की बात कही है। जगह की कमी के कारण कंपनी का यह प्रपोजल सिरे चढ़ता नहीं दिख रहा। करीब 200 बिस्तरों की ही सुविधा यहां मिलेगी।
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क्या कहता है प्रबंधन
आईजीएमसी के प्रिंसिपल प्रोफेसर एसएस. कौशल ने कहा कि प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सेवा योजना में 150 करोड़ का बजट मिला है। सुपर स्पेशलिटी ब्लॉक बनाने की प्रक्रिया चल रही है।