शिमला। हिमाचल के तीस हजार अवैध भवन मालिकों को राज्य सरकार ने बड़ी राहत दी है। इन्हें घर को वैध कराने के लिए सरकार ने लगभग डेढ़ महीने का वक्त दिया है। सरकार ने बुधवार को संशोधित अधिसूचना जारी कर दी है। कहा गया है कि नगर और ग्राम योजना संशोधन अध्यादेश के तहत अवैध भवनों को वैध करने के लिए लोगों से आवेदन मंगाने की तारीख 10 सितंबर से गिनी जाएगी। 45 दिन तक यह आवेदन जमा किए जाएंगे।
बुधवार को सचिवालय में बैठक कर घरों को वैध करने में बेहद सतर्कता बरने के निर्देश भी दिए गए। कहा गया कि अध्यादेश का खुद से अर्थ न निकाला जाए, जिससे भविष्य में किसी स्तर पर अड़चन खड़ी हो जाए। इसके लिए सचिव टाउन एवं कंट्री प्लानिंग आरडी नजीम ने प्रदेश भर के टीसपी कर्मचारियों, अधिकारियों, ड्राफ्टमैन और आर्किटेक्ट को विस्तार से समझाया।
नजीम ने कहा कि अध्यादेश में हर पहलू की विस्तार से जानकारी दी गई है। उसे केवल समझने की जरूरत है। खासतौर पर भवनों का नक्शा बनाने वाले ड्राफ्टमैन और आर्किटेक्ट को इस पर विशेष फोकस करने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि तय फार्मूले के तहत ही किसी भी भवन का संशोधित मानचित्र बनाया जाए। ऐसा नहीं है कि आवेदन जमा करने के साथ ही अवैध भवन का मानचित्र पास समझा जाएगा। उन्होंने कहा कि संशोधित मानचित्र जमा करने के बाद एक साल के भीतर टीसीपी की टीम की ओर से जमा किए गए संशोधित मानचित्र और मौके का मिलान किया जाएगा। इस दौरान अगर मिलान में गड़बड़ी पाई गई तो उस भवन को वैध कर पाना मुश्किल होगा। इसलिए जरूरी है कि हर स्तर पर सतर्कता बरती जाए। यह ध्यान रहे कि अवैध कब्जे की जमीन पर किसी भी सूरत में मानचित्र पास नहीं किया जाएगा।
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इनसेट -2
आवेदन के साथ क्या चाहिए
सभी दिशाओं से भवन का फोटो प्रमाण पत्र
आवेदक का शपथ पत्र
जमीन के कागजात की प्रति
आर्किटेक्ट से भवन का नक्शा प्रमाणित
आवेदन शुल्क एक हजार रुपये
भवन मानचित्र की तीन प्रतियां
संबंधित विभागों की एनओसी
मूल ततीमा की एक प्रति
इनसेट -3
आवासीय भवनों को नियमित करने का शुल्क
10 फीसदी तक अनाधिकृत - नियम में पहले से ही प्रावधान
10 से 20 प्रतिशत तक अनाधिकृत - 1000 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से
20 से 40 प्रतिशत तक अनाधिकृत - 2000 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से
40 से 60 प्रतिशत तक अनाधिकृत - 3000 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से
60 से 70 प्रतिशत तक अनाधिकृत - 4000 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से
इनसेट- 4
व्यवसायिक होगा महंगा
व्यवसायिक अवैध निर्माण को नियमित कराना सबसे अधिक महंगा होगा। उदाहरण के लिए शिमला के माल रोड पर अगर 70 फीसदी तक डिवीएशन करके निर्माण किया गया है तो वहां पर 16000 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से इसे नियमित करने का शुल्क वसूल किया जाएगा।