शिमला। प्रदेश के 50 ग्रामीण क्षेत्रों की सड़कें वन मंत्रालय की मंजूरी न मिलने के कारण लटक गई हैं। प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत हर गांव को सड़क सुविधा से जोड़ा जाना है। इनमें पांच सौ और ढाई सौ आबादी वाले गांव शामिल हैं। लोक निर्माण विभाग ने फोरेस्ट क्लीयरेंस का प्रस्ताव वन विभाग को भेजा था, लेकिन अभी तक इसकी मंजूरी नहीं मिल रही है। अब इन सड़कों की डीपीआर बननी रुक गई है।
लोक निर्माण विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक प्रदेश में अधिकांश पांच सौ आबादी वाले गांवों को सड़क सुविधा से जोड़ा गया है। अब सरकार ढाई सौ आबादी वाले गांवों को सड़क सुविधा से जोड़ रही है। कुल 7400 गांवों को सड़क सुविधा से जोड़े जाने का लक्ष्य है। 6200 गांवों में सड़क पहुंचाई जा चुकी है, जबकि 470 में अभी भी काम चल रहा है। इनमें से करीब 50 सड़कें ऐसी हैं, जिनकी डीपीआर नहीं बन रही है।
सैकड़ों पेड़ों की वजह से लटकी डीपीआर
ये 50 सड़कें जंगल के बीच से बननी हैं। सड़क निर्माण के दौरान सैकड़ों पेड़ों की बलि चढ़नी है। लोक निर्माण विभाग के पास सड़क निकालने के सिवाय दूसरा चारा भी नहीं है। ऐसे में ये मामला पेडिंग पड़ गया है।
फोरेस्ट क्लीयरेंस के लिए भेजा है मामला
लोक निर्माण विभाग के इंजीनियर इन चीफ नरेश शर्मा ने बताया कि पीएमजीएसवाई के तहत प्रदेश के हर गांव को सड़क सुविधा से जोड़ा जाना है। कुछ सड़कें वन विभाग की क्लीयरेंस के कारण फंसी हैं, जबकि कई ऐसी सड़कें भी हैं, जिसमें लोग खुद आपत्ति जता रहे हैं। जब तक लोग अपनी जमीन लोक निर्माण विभाग के नाम नहीं कर देते, सड़क का काम शुरू नहीं किया जा सकता।