शिमला। हिमाचल प्रदेश के दो दिग्गजों की लड़ाई में जनता के सरोकार गायब हो गए। 29 अगस्त तक चलने वाले विधानसभा के मानसून सत्र को महज पांच दिन में ही अनिश्चितकालीन के लिए स्थगित करना पड़ा। इस अवधि में मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह और नेता प्रतिपक्ष एक-दूसरे के खिलाफ केवल कीचड़ उछालने का काम करते रहे। यह पहल किसी ने नहीं की कि प्रदेश की आम जनता की समस्याओं को विधानसभा सदन के भीतर गंभीरता से चर्चा हो और उसका समाधान निकाला जाए। सत्र के दौरान तकरीबन पांच सौ से अधिक सवालों पर चर्चा भी नहीं हुई, जिसका जवाब नेताओं को भविष्य में देना पड़ेगा।
पहले दिन भाजपा ने वीरभद्र के इस्तीफे की मांग को लेकर वाकआउट किया। दूसरे दिन मनी लांड्रिंग को स्थगित करना पड़ा, जबकि तीसरे दिन विपक्ष के नारेबाजी के बीच एक घंटे का प्रश्नकाल चला। चौथे दिन भी भाजपा ने वाकआउट किया। बिना विपक्ष के ही सोमवार को सत्र चला। इस दौरान जहां विपक्ष ने वीरभद्र पर निशाना साधा, वहीं सत्ता पक्ष प्रेम कुमार धूमल पर लगे भ्रष्टाचार के मुद्दे को उठाता रहा। मंगलवार को तो हद हो गई। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह और नेता प्रतिपक्ष प्रेम कुमार धूमल आमने-सामने एक दूसरे के खिलाफ जमकर आग उगलते रहे। सहनशीलता दोनों पक्षों ने सदन में खो दी, जिसका नतीजा रहा कि जनता के सरोकार गायब हो गए।
-
इनसेट - 1
स्पीकर की पहल को किया नजरअंदाज
हिमाचल प्रदेश विधानसभा के स्पीकर ने मंगलवार सुबह 10 बजे सर्वदलीय बैठक बुलाई थी, जिसमें सभी दलों के नेता शामिल हुए। बुटेल की अपील पर सुबह आधे घंटे तक शांतिपूर्ण सदन चला, लेकिन बाद में सत्ता पक्ष से लेकर विपक्ष तक एक-दूसरे के खिलाफ आक्रामक हो गए। स्पीकर का प्रयास बेकार साबित हो गया। इससे स्पीकर दुखी भी दिखे।
-
इनसेट - 2
हेड मास्टर की भूमिका में नजर आए बुटेल
सदन में एक समय ऐसा रहा, जब विधानसभा के स्पीकर बीबीएल बुटेल हेड मास्टर के तौर पर नजर आए। बुटेल ने सत्ता पक्ष और विपक्ष को सदन चलाने के लिए घुट्टी पिलाई। उन्होंने दोनों पक्षों की नसीहतें भी दी। कहा कि सदन चलाना सत्ता और विपक्ष दोनों का काम है। मेरा काम तो बस सदन का संचालन करना है, लेकिन उनके इस प्रयास को भी सत्ता पक्ष ने सत्र अनिश्चित कालीन के लिए स्थगित करने का प्रस्ताव सदन में लाकर विफल कर दिया।