शिमला। हिमाचल में सेब ढुलाई में लगे वाहनों को जीपीएस प्रणाली से जोड़ा जाएगा। यह योजना पहले प्रदेश के कुछ क्षेत्रों में पायलट आधार पर चलाई जा रही थी। अब इसे अन्य क्षेत्रों में भी शुरू किया जाएगा। बागवानी मंत्री विद्या स्टोक्स ने शनिवार को सेब सीजन के दौरान प्रबंधों को लेकर समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए यह जानकारी दी।
स्टोक्स ने कहा कि उन्होंने लोक निर्माण विभाग को सड़कों को दुरुस्त करने के निर्देश दिए हैं। पिछले साल शिमला जिले में पायलट आधार पर ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (जीपीएस) को स्थापित किया गया था। उन्होंने जिला प्रशासन के जीपीएस को प्रभावी ढंग से लागू करने की प्रशंसा करते हुए कहा कि अन्य सेब उत्पादक जिलों में भी सेब ढुलाई में लगे वाहनों में यह सुविधा लागू की जाएगी। इससे सेब ढुलाई कार्यों में लगे वाहनों पर निगरानी रखी जा सकेगी। उन्होंने कहा कि शिमला जिले में गत वर्ष चालकों को पहचान पत्र भी जारी किए गए थे जिससे किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी से बागवानों को बचाया जा सके। उन्होंने निर्देश दिए कि अन्य सेब उत्पादक जिलों में भी चालकों को ऐसे ही पहचान पत्र जारी किए जाएं। इस मौके पर सेब उत्पादक क्षेत्रों के उपायुक्त, पुलिस अधीक्षक, आबकारी आयुक्त, बागवानी विभाग, एचपीएमसी, हिमफेड एवं एपीएमसी के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे
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टिपरा के पास पेटियों की चैकिंग को लगा बैरियर
स्टोक्स ने पुलिस प्रशासन को निर्देश दिए कि आबकारी एवं कराधान विभाग तथा एपीएमसी को नए पैकिंग कानून को प्रभावी तरीके से लागू करने में सहयोग दें। उन्होंने कहा कि सोलन जिले के परवाणु के पास टिपरा में बैरियर स्थापित किया जाएगा जहां के पेटियों के भार को जांचा जाएगा।