शिमला। हिमाचल सरकार 150 करोड़ रुपये का नया कर्ज लेने जा रही है। आर्थिक तंगहाली से जूझ रही सरकार ने यह नया फैसला लिया है। हालांकि, भारतीय रिजर्व बैंक के माध्यम से यह कर्ज विकास के नाम पर लिया जा रहा है। पर प्रदेश में कर्मचारियों के वेतन, पेंशनरों की पेंशन सहित विभिन्न योजनाओं में मौजूदा बजट के अत्यधिक खर्च के कारण ही यह निर्णय लेना पड़ा है।
हिमाचल सरकार कुछ माह पहले ही इसी तरह से 200 करोड़ रुपये का कर्ज ले चुकी है। अब यह ताजा कर्ज होगा। नया कर्ज लेने को सरकार ने शनिवार को अपनी प्रतिभूतियों की को बेचने के लिए अधिसूचना जारी कर ली। इसके लिए सरकार भारतीय रिजर्व बैंक के समक्ष प्रतिभूतियां रखी जाएंगी। सरकार ने इस अधिसूचना में लोन लेने की वजह इसका विकास कार्यों पर खर्च बताया है। सरकार अपनी प्रतिभूतियों को भारतीय रिजर्व बैंक के मुंबई कार्यालय द्वारा बेचेगी। ये रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के रखे कूपन रेट पर बेची जाएंगी।
बॉक्स 1.
10 वर्षों में चुकता होगा यह ऋण
हिमाचल सरकार इस ऋण को आगामी 10 वर्षों में चुकता करेगी। इसका ब्याज हर साल 23 जनवरी और 23 जुलाई को चुकता किया जाएगा।
बॉक्स 2.
केंद्रीय योजनाओं में हिमाचल का हिस्सा बढ़ाने से मजबूरी
केंद्र से 90:10 और 75:25 के अनुपात से वित्तपोषित कई योजनाओं में हिमाचल प्रदेश के हिस्से को बढ़ाया गया है। ऐसी कई योजनाओं अनुपात बढ़ाकर 50:50 कर दिया गया है। यानी हिमाचल को जहां कई योजनाओं में पहले अपना व्यय महज 10 फीसदी या 25 फीसदी करना होता था। वह इससे बढ़ाकर क्रमश: 25 या 50 प्रतिशत किया गया है।
कोट
‘हिमाचल सरकार ने 150 करोड़ रुपये के नए ऋण लेने का विचार किया है। यह भारतीय रिजर्व बैंक के माध्यम से लिया जा रहा है।’
श्रीकांत बाल्दी, प्रधान सचिव वित्त, हिमाचल सरकार।