शिमला। हिमाचल प्रदेश में छोटी आरा मशीनों के मालिकों को अब राज्य पर्यावरण संरक्षण एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) लेना जरूरी नहीं होगा। जिन शैक्षणिक स्कूलों में आवासीय या हॉस्टल की सुविधा नहीं है उनके प्रबंधकों को भी एनओसी के लिए अब बोर्ड कार्यालय के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। सोमवार को होटल होली डे होम में राज्य पर्यावरण संरक्षण एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की 70 वीं बैठक में ये फैसले लिए गए। बैठक की अध्यक्षता बोर्ड के चेयरमैन कुलदीप सिंह पठानिया ने की।
बैठक में निर्णय लिया गया कि जिन आरा मशीनों में 20 से कम कर्मचारी काम करते हैं, उनको प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से एनओसी लेने की जरूरत नहीं होगी। ऐसी आरा मशीनें बिना एनओसी के संचालित होंगी। प्रदेश में इनकी संख्या हजारों में है। छोटे उद्योगों के लिए भी राहत दी गई है। जिन छोटी औद्योगिक इकाइयों के पास कंप्यूटर एक्सपर्ट नहीं हैं, उन्हें ऑनलाइन आवेदन करने में दिक्कत आ रही है। उनके लिए बोर्ड आउटसोर्स की मदद से एक्सपर्ट रखकर उनकी दिक्कतें दूर की जाएंगी। बैठक में प्रधान सचिव ऊर्जा एसकेबीएस नेगी, सचिव वित्त अमनदीप गर्ग, बोर्ड के सदस्य सचिव विनीत कुमार, निदेशक परिवहन आरएन बत्ता, हिम ऊर्जा के सीईओ भानू प्रताप सिंह, सदस्य प्रेम कौशल, ईश्वर दास, अरविंद गुप्ता, मनीष शर्मा, दीपक सूद, उद्योग और शहरी विकास विभाग के प्रतिनिधि शामिल थे।
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शैक्षणिक संस्थान को राहत
जिन शैक्षणिक संस्थाओं के पास हॉस्टल या आवासीय परिसर नहीं हैं। उन्हें एनओसी लेने की अब जरूरत नहीं पड़ेगी। इससे प्रदेश के हजारों संस्थानों को बेवजह परेशानी नहीं उठानी पड़ेगी। जिन स्कूलों के हॉस्टल में 50 बच्चे हैं, उन्हें खुद का सेफ्टी टैंक बनाना होगा। इससे अधिक बच्चों वाले संस्थानों को सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाना होगा। जिस हॉस्टल में 200 बच्चे रहते हैं। उन संस्थानों को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालयों से ही एनओसी मिल जाएगी।
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कर्मचारियों पर भी मेहरबानी
प्रदेश सरकार की तर्ज पर ही प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में भी केस टू केस के आधार पर सेवा की सीमा 58 से बढ़ाकर 59 कर दी है। आवेदन करने वाले कर्मचारियों पर बोर्ड की ओर से विचार किया जाएगा। बोर्ड में काम करने वाले दिहाड़ीदारों की मजदूरी 150 से बढ़ाकर 170 रुपये कर दी गई है।
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पर्यटन को मिले बढ़ावा
प्रदेश में पर्यटकों को बढ़ावा देने के लिए भी बोर्ड की ओर से कदम उठाया गया। होम स्टे कराने वाले मकान मालिकों को भी किसी प्रकार की एनओसी लेने की आवश्यकता नहीं होगी। उन्हें बोर्ड कार्यालयों से चक्कर काटने से राहत दी गई। होम स्टे के तहत दो या तीन कमरे ही अधिक होते हैं। वैसे भी पर्यटक पूरे साल नहीं आते।