शिमला। हिमाचल में नए उद्योग को जमीन देने के लिए फिर से कानून बदलने की तैयारी है। निवेशकों को राहत देने के लिए नियम आडे़ आने पर ही यह तैयारी चल रही है। कैबिनेट की बैठक में कुछ दिन पहले हुई चर्चा के बाद सरकार इस पर मंथन कर रही है। जबसे हिमाचल से औद्योगिक पैकेज छिना, तभी से हिमाचल में नए उद्योगों के आने में अवरोध सा पैदा हो गया था। पैकेज के कुछ लाभों को बहाल करने के बाद अब उद्योग तो हिमाचल आने में दिलचस्पी दिखाने लगे हैं, पर उन्हें समय पर भूमि नहीं दिलाई जा पा रही है। नए उद्योगों की ओर से भी सरकार को इसके सरलीकरण का प्रस्ताव मिलने पर इस पर मंथन चल रहा है।
सिंगल विंडो क्लीयरेंस में भी भूमि आवंटन की प्रक्रिया के सरलीकरण के बावजूद इसकी सरकारी स्तर पर अंतिम मंजूरी में कई पेंच हैं। इन्हीं पेंचों को हटाकर उपायुक्तों को अंतिम स्वीकृति के अधिकार देने की तैयारी है। यह विशेष है कि उद्योगों के लिए 118 की मंजूरी सहित अन्य प्रक्रियाओं का सरलीकरण करने का उल्लेख मुख्यमंत्री के बजट भाषण में रहा है।
राजस्व मंत्री कौल सिंह ठाकुर ने कहा है कि उद्योगों के लिए भूमि आवंटन की प्रक्रिया सिंगल विंडो क्लीयरेंस के बाद भी जटिल है। इसके सरलीकरण का मामला मंत्रिमंडल की बैठक में भी उठा है। भूमि सुधार अधिनियम की धारा 118 में संशोधन करने को लेकर भी विचार चल रहा है। हालांकि, इसके सभी पक्षों को स्पष्ट करना जरूरी है।