शिमला। कर्मचारी नेताओं सुरिंद्र सिंह मनकोटिया और एसएस जोगटा में एक पत्र बम को लेकर फिर ठन गई है। एसएस जोगटा के वर्ष 2009 के लिखे एक पत्र को मनकोटिया ने वीरवार को मीडिया में जारी किया। साथ ही कहा कि जोगटा के इस पत्र पर विचार किया जा रहा है। उन्हें 25 मई को छोटा शिमला में आयोजित कार्यकारिणी की बैठक में बुलाया जाता है। मनकोटिया ने कहा कि अगर जोगटा इस बैठक में नहीं आते हैं तो वह मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के आदेश की अनुपालना नहीं करते हैं। हिमाचल प्रदेश अराजपत्रित कर्मचारी संघ के दो अलग-अलग गुटों के अध्यक्ष मनकोटिया और जोगटा इस तरह से आमने-सामने हैं।
जोगटा की ओर से यह पत्र 6 दिसंबर 2012 को अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के तत्कालीन अध्यक्ष लाल सिंह चावला को लिखा दर्शाया गया है। पत्र के अनुसार जोगटा तक जिला शिमला एनजीओ फे डरेशन के चेयरमैन थे। साथ मेें प्रवक्ता हरीश गुलेरिया के हवाले से जारी प्रेस नोट में कहा गया है कि सुरिंद्र मनकोटिया की अध्यक्षता में हुई बैठक में मुख्यमंत्री की उस इच्छा का आदर किया गया, जिसमें वे महासंघ को एकजुट देखना चाहते हैं। इसमें तय किया गया कि छह दिसंबर को एसएस जोगटा के 6 दिसंबर 2009 के पत्र पर सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जाएगा। जोगटा का यह पत्र 20 नवंबर 2010 को भी सोलन में हुई फेडरल कमेटी की बैठक में रखा गया था। उस समय के अध्यक्ष चावला के प्रमोट होने की वजह से इसे डेफर किया गया था। अब इस पर 25 मई को विचार होगा। इसमें जोगटा को भी बुलाया गया है।
इनसेट
मेरा पत्र लेकर दुष्प्रचार कर रहे मनकोटिया : जोगटा
शिमला। एसएस जोगटा ने कहा कि जो पत्र मनकोटिया ने जारी किया है, उसे मैंने दिसंबर 2009 में अपने प्रधान लाल सिंह चावला को लिखा था। मैं हैरान हूं कि आज यह मनकोटिया के हाथ में कहां से आ गया। मनकोटिया मेरे खिलाफ दुष्प्रचार कर रहे हैं। मैं इस दुष्प्रचार के कानूनी पहलुओं को देख रहा हूं और इन्हीं के मुताबिक आगामी कार्रवाई करूंगा। जोगटा बोले कि मनकोटिया भ्रष्टाचार में फंसे हैं। वह जेल जाने से डरे हुए हैं, इसलिए ऐसी हरकतें करने लगे हैं।