शिमला। हिमाचल प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन (एचपीसीए) लीज मामले में मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह, डीजीपी संजय कुमार, डीसी कांगड़ा सी पालरासू और कांगड़ा के एसपी बलबीर सिंह को निजी तौर पर प्रतिवादी बनाए जाने के लिए दाखिल किए गए आवेदन पर हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मंसूर अहमद मीर और न्यायाधीश तरकोल सिंह चौहान की खंडपीठ के समक्ष प्रार्थी सरकार और रजिस्ट्रार सोसाइटी ने अपना-अपना पक्ष रखा। इस मामले में हाईकोर्ट ने आठ जनवरी को मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह, डीजीपी संजय कुमार और डीसी कांगड़ा सी पालरासू और कांगड़ा के एसपी बलबीर सिंह को निजी तौर पर प्रतिवादी बनाए जाने के लिए दायर किए गए आवेदन को ठुकरा दिया था। प्रार्थी एचपीसीए ने इस निर्णय को सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष चुनौती दी थी। सर्वोच्च न्यायालय ने मामले को गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट को निर्णय निरस्त कर दिया था। इस आवेदनों पर दोबारा सुनवाई करने के बाद फैसला सुनाने के आदेश दिए थे।
ध्यान रहे कि प्रदेश सरकार ने एचपीसीए की लीज को रद्द कर दिया था। एचपीसीए की संपत्ति को रातों रात कब्जे में ले लिया था। एचपीसीए ने अपने आवेदन में आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के कहने पर प्रशासन ने पुलिस बल प्रयोग कर धर्मशाला और अन्य स्टेडियमों को अपने कब्जों में लिया था। आवेदन में आरोप लगाया गया था कि एचपीसीए के खिलाफ कार्रवाई मुख्यमंत्री के इशारे पर की जा रही है।