ऐसे तो पीलिया से पार पाना संभव नहीं दिख रहा है। नगर निगम खुद बावड़ियों और चश्मों के पानी को दूषित करार दे चुका है, पर इन इलाकों में स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति करने को निगम कुछ नहीं कर पाया है। नतीजतन, मजबूरी में लोगों को इन्हीं बावड़ियों और चश्मों का पानी पीना पड़ रहा है। बावड़ियों के पानी के सैंपल फेल हो चुके हैं। निगम को लोगों की कोई परवाह नहीं, कोई बीमार होता है तो होता रहे।
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शिमला। बावड़ियों का पानी पीने से कई लोग पीलिया की चपेट में आ गए हैं। अधिकांश मामले टुटू, मल्याणा, विकासनगर, देवनगर, पंथाघाटी, खलीनी, मैहली, मल्याणा, बस स्टैंड, संजौली, घणाहट्टी और शोघी से आ रहे हैं। हैरत की बात है कि अस्पतालोें में पीलिया के इक्का-दुक्का मामले रूटीन में ही आ रहे हैं, जबकि झाड़फूंक करने वाले दावा कर रहे हैं कि उनके पास रोजाना सैकड़ों लोग पीलिया झाड़ने के लिए आ रहे हैं। दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल में दो महीने में 110 और आईजीएमसी में 231 पीलिया के मरीज पहुंचे हैं।
मल्याणा की लक्ष्मी, मैना देवी, शालू ठाकुर और नीना ठाकुर का कहना है कि वह बर्तन, कपड़े धोने के लिए नगर निगम और आईपीएच का पानी इस्तेमाल करते हैं। पानी बारिश के दिनों में मटमैला आता है, इसलिए पीने और खाने के लिए बावड़ियों का पानी ठीक रहता है। कम से कम साफ तो दिखता है।
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रोजाना आ रहे 150-200 मरीज
झाड़फूं क करके इलाज का दावा करने वाले बैम्लोई निवासी जगत राम का कहना है कि पिछले एक महीने से रोजाना 150 - 200 पीलिया के मरीज उनके पास आ रहे हैं। अधिकतर मामले बस स्टैंड, कृष्णानगर, फागली, विकासनगर, देवनगर, खलीणी, मैहली, मल्याणा, शनान, ढली और संजौली से आ रहे हैं। खलीणी से इलाज करवाने आई शीतला देवी ने बताया कि पिछले पांच दिनों से वह यहां पीलिया झड़वाने आ रही हैं।
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पपीता, मूली की मांग बढ़ी
मल्याणा स्थित फल और सब्जी विक्रेता गुलाबी देवी का कहना है कि दु़कान में पपीते और मूली की मांग बढ़ गई है। पीलिया फैलने के कारण ऐसा हुआ है। मरीजों को दोनों फल खाने की सलाह दी जाती है।
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पीलिया है तो ध्यान रखें
पीलिया के मरीजों को श्रम से बचना चाहिए। आराम करें। लीवर शरीर की रासायनिक प्रयोगशाला है। इसलिए लीवर रोगों से ग्रस्त मरीजों को भोजन में भी विशेष ध्यान देने की जरूरत होती है। संतुलित भोजन का सेवन करें पर वसा की मात्रा कम होनी चाहिए। दवाइयों का सेवन मनमर्जी से न करें। मदिरा लीवर के मरीजों के लिए जहर है।
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इसलिए पी रहे हैं बावड़ियों का पानी
जो लोग ढारों में रह रहे हैं, और जिनके घरों में पानी के कनेक्शन नहीं हैं, उन्हें मजबूरी में बावड़ियों का पानी पीना पड़ रहा है। बावड़ियों के आसपास से सीवरेज पाइप गुजरते हैं। लीकेज होने पर सीवरेज का पानी बावड़ियों में मिल रहा है। ब्लीचिंग पाउडर डालने के बाद भी पानी पीने में खतरा रहता है। लोगों को लगता है कि ब्लीचिंग पाउडर बावड़ी में डल गया अब कोई खतरा नहीं।
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ऐसे करें बचाव
भोजन, पानी की स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें
संक्रमित इंजेक्शन और औजार का प्रयोग न करें
हेपेटाइटस का जांचा गया रक्त ही चढ़ाया जाए
हेपेटाइटस ए और बी का टीका लगवाएं
झाड़फूंक से बचें, डाक्टर के पास जाएं
डा. रमेश, वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक, आइजीएमसी
जागृति नेगी