शिमला। सांसद अनुराग ठाकुर और उनके भाई अरुण धूमल के खिलाफ अवैध भू-सौदे के केस में जांच जमीन बेचने वाले व्यक्ति के हस्ताक्षरों की पहचान न होने के कारण अटकी पड़ी है। धर्मशाला के कजलोट में ये जमीन धूमल पुत्रों ने 2008 में खरीदी थी। करीब 32 मरला इस जमीन की 7 लाख रुपये में रजिस्ट्री हुई है। विजिलेंस का कहना है कि इस जमीन को बेचने के बाद प्रेमु फिर से भूमिहीन हो गए थे।
राज्य में सरकार बदलने के बाद कांग्रेस सरकार ने इस सौदे को अवैध बताते हुए विजिलेंस में एफआईआर दर्ज की थी। ये कहते हुए कि प्रेमु को जमीन भूमिहीन होने के कारण सरकार ने दी थी। इस सौदे के बाद वह दोबारा भूमिहीन हो गया, लेकिन प्रेमु की मौत होने के बाद अब उनके हस्ताक्षरों की स्टिक पहचान नहीं हो पा रही है। हस्ताक्षर मिलान के लिए धर्मशाला स्थित फोरेंसिक लैब में दस्तावेज गए हैं। लेकिन लैब ने हस्ताक्षर के मिलान के लिए विजिलेंस से प्रेमु के हस्ताक्षरों के नमूने की आवश्यकता जताई है। कांग्रेस चार्जशीट आधारित इस मामले में कांग्रेस ने प्रेमु की मौत पर भी सवाल उठाए हैं। हालांकि, अभी तक की जांच में विजिलेंस ने प्रेमु की मौत को प्राकृतिक पाया है।
विजिलेंस को प्रेमु के हस्ताक्षरों वाले दस्तावेज न मिलने के कारण जांच फिलहाल लंबित है। करीब दो महीने से इस मामले की जांच धीमी पड़ी है। हालांकि, धर्मशाला विजिलेंस टीम हिमाचल प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन पर दर्ज तीन एफआईआर मामलों की जांच को प्राथमिकता के आधार पर देख रही है। एडीजीपी पृथ्वीराज ने बताया कि मामले की जांच चल रही है। दस्तावेज एकत्र किए जाए रहे हैं।