शिमला। सुजानपुर उपचुनाव में भाजपा का टिकट पाने वाले नरेंद्र ठाकुर राजनीति में रिश्तेदारी की नई कड़ी हैं। कांग्रेस की टिकट पर धूमल और अनुराग को दो बार चुनाव में चुनौती देने वाले नरेंद्र ठाकुर उर्फ गुड्डू 24 मार्च को भाजपा में लौटे थे। 10 अप्रैल को उन्हें भाजपा का टिकट मिल गया। 16 दिन के भीतर नरेंद्र भाजपा प्रत्याशी हो गए और उर्मिल ठाकुर का टिकट कट गया। अब सवाल ये है कि क्या इसमें रिश्तेदारी का भी कोई योगदान है?
नरेंद्र ठाकुर पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल के भरोसेमंद पूर्व मंत्री रविंद्र रवि के होने वाले समधी हैं। रवि के बेटे की शादी नरेंद्र की बेटी से तय हुई है। नरेंद्र जब भाजपा छोड़ गए थे, तो भी उनके पिता स्व. जगदेव चंद की विरासत को उनकी भाभी उर्मिल ठाकुर आगे बढ़ा रही थीं। हालांकि जगदेव परिवार के रिश्ते कभी धूमल के साथ ज्यादा सहज नहीं रहे। अब भाजपा को उम्मीद है कि नरेंद्र की घर वापसी और विधानसभा टिकट मिलने के बाद इस नए रिश्ते के बहाने जगदेव परिवार पार्टी को मजबूती देगा। इससे पहले मंडी के दो ठाकुरों के साथ पहले से ही धूमल परिवार की रिश्तेदारी है। जोगिंद्रनगर से विधायक एवं पूर्व मंत्री गुलाब सिंह ठाकुर की बेटी धूमल की बहू हैं। धर्मपुर में विधायक एवं पूर्व मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर की बहू धूमल परिवार से हैं।
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टिकट कटने पर उर्मिल ने पूछा, मेरा क्या कसूर?
टिकट कटने से निराश उर्मिल ठाकुर ने पार्टी से पूछा है कि उनका कसूर क्या है? पूर्व विधायक उर्मिल ने कहा कि पूरे हमीरपुर संसदीय क्षेत्र में वह अकेली महिला दावेदार थी, लेकिन लगातार आश्वासन देने के बावजूद उनका टिकट काट दिया गया। इससे पहले हर चुनाव में उनकी परफॉरमेंस अच्छी रही है। 2012 का विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए उन्हें अचानक सुजानपुर भेजा गया। सुजानपुर में मैदान पहले से तैयार कर किसने किसे दिया था, ये भी सब जानते हैं। उर्मिल ने कहा कि पार्टी ये जांच करे कि सुजानपुर में भाजपा की हालत पिछले चुनाव में खराब क्यों हुई? इसका दोष उन्हें नहीं दिया जा सकता। हालांकि, भविष्य की रणनीति पर कुछ भी कहने से उर्मिल ठाकुर ने इनकार किया।