शिमला। मुख्यमंत्री कार्यालय में तैनात तीन पूर्व आईएएस अफसरों का सरकार ने बचाव किया है। कार्यवाहक मुख्य सचिव पी. मित्रा की ओर से चुनाव आयोग को जवाब दिया गया है कि इन अधिकारियों के पास न तो प्रशासनिक फैसले लेने का अधिकार है, न ही ये कोई चुनावी काम कर रहे हैं। ये आरोप भी गलत हैं कि ये मुख्यमंत्री के करीबी हैं। राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी ने ये जवाब अब केंद्रीय चुनाव आयोग को भेज दिया है।
एचपीसीए ने चुनाव आयोग से शिकायत की थी कि मुख्यमंत्री कार्यालय में मौजूद रिटायर अफसर सरकार के प्रभाव का इस्तेमाल कर चुनाव को प्रभावित कर सकते हैं। चूंकि ये रिटायर भी हो चुके हैं, इसलिए इनकी जिम्मेदारी तय करने में भी कई सीमाएं हैं। इसलिए इन्हें चुनाव तक इन पदों से हटाया जाए। शिकायत में मुख्यमंत्री के सलाहकार टीजी नेगी, प्रधान निजी सचिव सुभाष आहलूवालिया और ओएसडी टीसी जनारथा के नाम थे। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने चुनाव आयोग से पत्र आने के बाद मुख्य सचिव से इनके बारे में जवाब मांगा था। इस मामले में अब मुख्य सचिव ने जवाब दायर कर दिया है।
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अब तक आचार संहिता तोड़ने की 120 शिकायतें
हिमाचल प्रदेश में आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन की रोज नई शिकायतें सामने आ रही हैं। पांच मार्च से दो अप्रैल के बीच में लगभग 120 से अधिक शिकायतें मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय को प्राप्त हो चुकी हैं। इन शिकायतों को लेकर आयोग की ओर से नोटिस भी जारी किया जा चुका है, लेकिन इनमें से कुछ का तो जवाब आया है। कुछ का अभी तक जवाब नहीं आ पाया है।