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तो इतने ज्यादा लोग पीलिया से परेशान क्यों हैं

Mon, 25 Feb 2013 05:31 AM IST
Shimla
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शिमला। पानी के सैंपल पर आईपीएच की रिपोर्ट ठीक है तो इतने ज्यादा लोग पीलिया से परेशान क्यों हैं? खामियां कहां हैं? अस्पतालों के वार्ड पीलिया के मरीजों से भरे पड़े हैं। जो पानी आप पी रहे हैं, वह सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट से ट्रीट होकर नल तक पहुंच रहा है। मल्याणा स्थित इस सीवरेज प्लांट से पानी तभी बेहतर होकर बाहर निकलेगा जब यह विभिन्न चरणों में कम से कम छत्तीस घंटे तक ट्रीट होगा। लेकिन यहां केवल बीस घंटे तक सीवरेज को ट्रीट कर अश्वनी खड्ड भेजा जा रहा है। ऐसे में आईपीएच महकमा कैसे यह दावा कर सकता है कि शहरवासियों को शुद्ध जल दे रहे हैं। कौन सही है, कौन गलत यह जांच का विषय है लेकिन अस्पताल में आने वाले मरीजों की संख्या से साफ हो रहा है कि जिन इलाकों में पीलिया फैला है, वहां पर अश्वनी खड्ड से ही पानी की सप्लाई हो रही है।
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बनी रहेगी दूषित पेयजल की समस्या
विशेषज्ञ बताते हैं कि जब तक शहर में सीवरेज व्यवस्था को लेकर फूल प्रूफ मैकेनिज्म नहीं अपनाया जाता, दूषित पेयजल की समस्या बनी रहेगी। आधे शहर में न तो अभी सीवरेज सिस्टम है और न ही रिसती सीवरेज लाइनों को रोकने के सही इंतजाम। इससे पानी में सीवरेज की गंदगी से स्थिति बेकाबू होती जा रही है। उपनगरों को आपूर्ति कर रही पेयजल योजनाओं पर सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट बने हैं। उससे भी पीने का पानी दूषित हो रहा है।
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इन इलाकों में सीवरेज सुविधा नहीं
शिमला के टुटू, ढली, इंद्र नगर, न्यू शिमला, मल्याणा, कुफ्टाधार क्षेत्रों में लोग सीवरेज सुविधा से वंचित हैं। अधिकतर लोग अभी भी सेप्टिक टैंक प्रयोग में ला रहे हैं। बारिश होते ही ये लोग अपने सेप्टिक टैंक खोल देते हैं जो पेयजल स्रोत में जा मिलते हैं।
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सीवरेज के महज 12,415 कनेक्शन
शिमला में नगर निगम व आईपीएच विभाग ने कुल 12,415 सीवरेज के कनेक्शन जारी किए हैं। राजधानी में भवनों की संख्या पच्चीस हजार के करीब है। ऐसे में करीब तेरह हजार भवन मालिकों के पास सीवरेज कनेक्शन नहीं हैं।
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निष्पक्ष एजेंसी करे पानी के सैंपल की जांच : पंवर
उप महापौर टिकेंद्र पंवर ने कहा कि अश्वनी खड्ड से आने वाला पानी कितना पीने लायक है, इसकी जांच निष्पक्ष एजेंसी से करवाई जाए। मल्याणा में सीवरेज का पानी सही से ट्रीट नहीं हो रहा। ट्रीट के लिए कम से कम छत्तीस घंटे तक की आवश्यकता है लेकिन वहां केवल बीस घंटे ही ट्रीट हो रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार को इस बारे में अवगत करवाकर आगामी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।

क्या कहता है आईपीएच
आईपीएच के अधिशासी अभियंता प्रीत मोहिंद्र सिंह ने कहा कि प्लांट में बाइस घंटे में सीवरेज युक्त पानी को पीने लायक बना दिया जाता है। इसके बाद इसे अश्वनी खड्ड में छोड़ा जाता है। प्लांट से अश्वनी खड्ड की दूरी करीब छह किलोमीटर है। रास्ते में पानी जब बहकर जाता है तो रही सही कसर दूर हो जाती है। सैंपल रोज लिए जा रहे हैं, जो ठीक हैं।
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