शिमला। शिमला विधानसभा सीट पर किसी एक दल का कब्जा नहीं रहा है। राजधानी की जनता ने भाजपा, कांग्रेस व माकपा तीनों ही दलों को शहर के प्रतिनिधित्व का मौका दिया है। 1985 के बाद हुए चुनाव में दो बार भाजपा, दो बार कांग्रेस व एक बार माकपा के प्रत्याशी को लोगों ने जीत दिलाकर विधानसभा भेजा है। हालांकि जीत में कोई बड़ा मत अंतर नहीं रहा है।
प्रदेश की राजधानी शिमला में चुनावों के दौरान राजनीतिक दलों को कई उतार-चढ़ाव देखने पड़े हैं। हालांकि भाजपा कांग्रेस व माकपा तीनों को ही प्रतिनिधित्व का मौका मिला है। बीते चुनाव के दौरान सियासी दलों के प्रत्याशियों ने बहुत बड़े मार्जन से कभी जीत दर्ज नहीं की है। 1993 के चुनाव में तो माकपा प्रत्याशी राकेश सिंघा ने कांग्रेस प्रत्याशी हरभजन सिंह भज्जी से मात्र 159 वोटों से जीत दर्ज की थी। 2003 के चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी हरभजन सिंह भज्जी 12060 वोटों के साथ पहले स्थान पर व 9949 वोट लेकर सीपीआईएम प्रत्याशी संजय चौहान दूसरे स्थान पर रहे थे। दोनों उम्मीदवारों के बीच सिर्फ 2111 वोटों का मत अंतर था। 1998 के चुनाव में भाजपा प्रत्याशी नरेंद्र बरागटा ने 14758 वोट लेकर जीत दर्ज की थी। कांग्रेस के प्रत्याशी हरभजन सिंह भज्जी 12155 वोट लेकर दूसरे स्थान पर रहे थे। दोनों प्रत्याशियों के बीच 2603 वोटों का मत अंतर था। 1993 के चुनाव में सीपीआईएम प्रत्याशी राकेश सिंघा ने 11854 वोट हासिल कर जीत दर्ज की थी और कांग्रेस के प्रत्याशी हरभजन सिंह भज्जी 11695 वोट हासिल कर दूसरे स्थान पर रहे थे। दोनों प्रत्याशियों के बीच मात्र 159 वोटाें का मत अंतर था।
शिमला विधानसभा सीट का इतिहास
सन पार्टी प्रत्याशी
2007 भाजपा सुरेश भारद्वाज
2003 कांग्रेस हरभजन सिंह भज्जी
1998 भाजपा नरेंद्र बरागटा
1993 सीपीआई राकेश सिंघा
1990 भाजपा सुरेश भारद्वाज
1985 कांग्रेस हरभजन सिंह भज्जी
- पिछले चुनाव में नंबर तीन पर पहुंच गई थी कांग्रेस
2007 के चुनाव में शिमला विधानसभा सीट पर कांग्रेस पिछड़कर तीसरे स्थान पर पहुंच गई थी। भाजपा प्रत्याशी सुरेश भारद्वाज ने 12443 वोट प्राप्त कर जीत हासिल की थी जबकि सीपीआईएम के प्रत्याशी संजय चौहान 9855 वोट हासिल कर दूसरे स्थान पर रहे थे। कांग्रेस के प्रत्याशी हरभजन सिंह भज्जी 8330 वोट हासिल कर तीसरे स्थान पर रहे थे। इसके अलावा बीएसपी व एलजेपी सहित 3 निर्दलीय प्रत्याशी भी चुनाव मैदान में थे।