यास्मीन को सिर्फ इसलिए उसके पति ने छोड़ दिया क्योंकि वो लगातार चार बच्चियों को जन्म दिया था लेकिन यास्मीन के इरादे इतने कमजोर नहीं थे कि वो दर-दर की ठोकर खाए। गोंडा में रहते हुए ही उन्होंने आगे बढ़ने की ठानी, बच्चों को अच्छा भविष्य देने का सपना संजोकर एक स्वयं सहायता समूह स्थापित किया। जिसमें आज बहुत सारी महिलाएं मिलकर प्रतिदिन सिलाई करती हैं और खुश रहती हैं। इन सभी महिलाओं और देश की अन्य कई महिलाओं के लिए यास्मीन आज प्रेरणा बन चुकी हैं। जानिए यास्मीन की पूरी कहानी।
ऐसी है यास्मीन की कहानी-
दूसरी महिलाओं के लिए बन गईं आदर्श
यास्मीन के महिला समूह को प्रशासन ने विद्यालयों के लिए 3 हजार ड्रेस सिलने का काम दिया। इसके लिए समूह को 3 लाख रुपए का पेमेंट मिला। यास्मीन के प्रयास धीरे-धीरे इस तरह सार्थक होने लगे। महिलाओं ने भी उन पर विश्वास दिखाया और वर्तमान में वे अपने समूह की महिलाओं और उनकी बच्चियों के लिए आदर्श बन गई हैं। यास्मीन ने आगे बढ़ने के बाद कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और अब वे बच्चियों को भी अच्छा जीवन दे पा रही हैं।
तीन लाख के पेमेंट से चुक गया लोन