Who is DSP Parul Chaudhary : मेरठ की उड़नपरी के नाम से मशहूर भारतीय महिला एथलीट पारुल चौधरी को उत्तर प्रदेश सरकार ने बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। पारुल चौधरी को मुरादाबाद में नियुक्ति मिली है। पारुल चौधरी उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले के दौराला क्षेत्र के एक छोटे से गांव की रहने वाली है। लेकिन उनकी उपलब्धियां छोटी नहीं हैं। उन्होंने एथलेटिक्स की दुनिया में भारत का नाम रोशन किया है और अब उत्तर प्रदेश पुलिस में डिप्टी एसपी के पद पर नियुक्त होकर एक नई मिसाल कायम की है। आइए जानते हैं कौन हैं डीएसपी पारुल चौधरी और उनकी उपलब्धियां।
कौन हैं पारुल चौधरी?
पारुल चौधरी मेरठ की रहने वाली हैं। पारुल के पिता, कृष्ण पाल चौधरी एक किसान हैं। पारुल ने अपने करियर की शुरुआत पश्चिम रेलवे, मुंबई में ट्रेन टिकट परीक्षक (TTE) के रूप में की थी। उन्होंने कठिन परिश्रम और समर्पण से एथलेटिक्स में सफलता प्राप्त की और अब पुलिस सेवा में भी योगदान दे रही हैं।
पारुल की खेल में रूचि
साधारण किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाली पारुल ने अपनी बड़ी बहन प्रीति के साथ खेलना शुरू किया। स्कूल की दौड़ प्रतियोगिता में प्रतिभाग कर उन्होंने अपने खेल सफर की शुरुआत की। गांव की टूटी फूटी सड़कों पर अभ्यास करती रहीं। उनके प्रयासों का नतीजा निकला की कोच गौरव त्यागी के कहने पर पारुल स्टेडियम में अभ्यास करने लगीं।
-
पुलिस सेवा में योगदान
पारुल चौधरी ने 19 मई 2025 को मुरादाबाद जिले में डिप्टी एसपी के पद पर कार्यभार संभाला। यह नियुक्ति उन्हें उनकी खेल उपलब्धियों के आधार पर उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा प्रदान की गई।
पारुल चौधरी की उपलब्धियां
चीन के हांगझोउ में हुए एशियन गेम्स 2023 में पारुल ने 5000 मीटर दौड़ में स्वर्ण पदक जीता था। इसके अलावा 3000 मीटर स्टीपचेज में रजत पदक हासिल किया। बैंकाॅक में हुए एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप 2023 में भी पारुल ने 3000 मीटर स्टीपलचेज में स्वर्ण पदक हासिल किया। उसके पहले गुजरात में हुए राष्ट्रीय खेल 2022 में 500 मीटर की दौड़ में स्वर्ण पदक जीत चुकी हैं।2024 के पेरिस ओलंपिक में भी उन्होंने टीम का नेतृत्व किया था।
सम्मान और पुरस्कार
पारुल चौधरी को खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए भारत सरकार द्वारा सम्मानित किया जा चुका है। उन्हे अर्जुन पुरस्कार 2023 मिला है। इसके पहले उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा महिला सशक्तिकरण के लिए प्रदान किया जाने वाला रानी लक्ष्मीबाई पुरस्कार 2021 से भी सम्मानित किया जा चुका है।