फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Mission Shakti: यूपी की बेटी ने सैनिटरी पैड उद्यम से लिखी सफलता की कहानी, ग्रामीण महिलाओं को दिया रोजगार

Tue, 07 Oct 2025 06:02 PM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Mission Shakti
विज्ञापन
नीलम गुप्ता - फोटो : https://missionshakti.wcd.gov.in/
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

उत्तर प्रदेश की महिलाएं आत्मनिर्भरता और स्वावलंबन की मिसाल बनकर उभर रही हैं। इसमें उत्तर प्रदेश की योगी सरकार की कुछ योजनाओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। यूपी सरकार के मिशन शक्ति के तहत अब तक कई महिलाओं को रोजगार मिला, गृहणी या ग्रामीण महिलाएं उद्यमिता के क्षेत्र में परचम लहरा रही हैं। प्रदेश के छोटे से जिले भदोही की रहने वाली नीलम गुप्ता मिशन शक्ति के तहत अपने सपने साकार करने और स्वावलंबी बनने में सफल हो सकी हैं। 
विज्ञापन


कौन हैं नीलम गुप्ता?

33 वर्षीय नीलम गुप्ता की यात्रा एक स्नातक, पूर्व ग्राम प्रधान और एक समर्पित स्वयं सहायता समूह 'प्रगति समूह' की सदस्य के रूप में ग्रामीण महिलाओं की उभरती आकांक्षाओं को दर्शाती है जो अब केवल जीविका के लिए समझौता करने को तैयार नहीं हैं। वर्ष 2020 में, जब उनके 'प्रगति समूह' में मासिक धर्म स्वास्थ्य और आजीविका के अंतर पर चर्चा हुई, तब नीलम को एक ऐसा रास्ता दिखाई दिया, जो दोनों समस्याओं का समाधान प्रस्तुत करता था। गांव की अधिकांश महिलाओं के पास न तो सुलभ और किफायती सैनिटरी पैड की पहुंच थी और न ही वे सामाजिक कलंक के चलते उन्हें खरीदने में सहज थीं। साथ ही, सम्मानजनक रोजगार के अवसर भी सीमित थे। नीलम ने सोचा यदि एक उद्यम इन दोनों समस्याओं का हल बन सके तो इससे बेहतर कुछ नहीं हो सकता।

नीलम ने की सैनिटरी नैपकिन उद्यम की शुरुआत

नीलम बताती हैं कि उनके लिए उद्यमिता केवल आय का साधन नहीं थी, बल्कि सामाजिक प्रभाव का एक माध्यम थी। आत्मनिर्भर क्लस्टर लेवल फेडरेशन (CLF) और स्वामी विवेकानंद शिक्षा समिति (SVSS) के सहयोग से डेवलपमेंट अल्टरनेटिव्स की पहल में भाग लेते हुए, महिलाओं द्वारा संचालित सैनिटरी नैपकिन उद्यम 'वंशिका लाइफ केयर' की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि दिल्ली स्थित एक निर्माता से थोक में सैनिटरी पैड मंगवाए, स्थानीय स्तर पर ब्रांडिंग और पैकेजिंग की व्यवस्था की इस मॉडल ने लागत को कम रखा और संचालन को गांव के भीतर ही संभव बनाया।
विज्ञापन


उद्यमिता की राह नहीं थी आसान

हालांकि, किसी भी प्रथम-पीढ़ी की उद्यमी की तरह, नीलम की राह आसान नहीं रही। कच्चे माल की आपूर्ति, पैकेजिंग, ग्राहकों का आधार बनाना हर कदम पर नई चुनौतियां थीं। लेकिन हर सहकर्मी प्रशिक्षण, स्वयं सहायता समूह की बैठक और एक्सपोज़र विज़िट के साथ नीलम का आत्मविश्वास बढ़ता गया। 2024 तक उन्होंने बड़ौदा यूपी बैंक से 10–12 लाख रुपये का ऋण प्राप्त कर लिया था।  SVSS द्वारा समर्थित वित्तीय नेटवर्किंग की मदद से और अपने स्वयं के कार्य बल का निर्माण शुरू किया।

आज नीलम लोगों को दे रहीं रोजगार

नीलम बताती हैं कि आज उनके साथ सात पूर्णकालिक कर्मचारी जुड़ी हैं जिसे वो रोजगार दी हैं। इसके अलावा अधिकतम मांग के समय में दस से अधिक अंशकालिक कर्मचारियों को इससे रोजगार मिलता है। उनकी टीम न केवल पैकेजिंग और वितरण का कार्य करती है, बल्कि मासिक धर्म स्वास्थ्य पर जागरूकता अभियान भी चलाती है। चार महिलाएं घर-घर जाकर उत्पाद बेचती हैं, दो पुरुष कर्मचारी दुकानों तक आपूर्ति करते हैं और एक समर्पित प्रशिक्षक आस-पास के गाँवों और CLF में स्वास्थ्य सत्र आयोजित करता है।

अपने उद्यम को बनाया सफल

'वंशिका लाइफकेयर' अब प्रतिमाह 40,000 से 60,000 रुपये तक का लाभ अर्जित कर रही है और पूरे समुदाय में सकारात्मक बदलाव की लहर फैला रही है। नीलम सिर्फ़ एक व्यवसाय नहीं चला रही हैं बल्कि वे एक सामाजिक व्यवस्था को चुनौती दे रही हैं। उनका कार्य मासिक धर्म से जुड़ी वर्जनाओं को तोड़ना है, ग्रामीण महिलाओं के लिए गरिमामयी रोजगार के अवसर पैदा करता है और यह दर्शाता है कि "गैर-पारंपरिक" उद्यम कैसा हो सकता है। वे डेवलपमेंट अल्टरनेटिव्स द्वारा "उच्च-विकास वाले जमीनी स्तर की उद्यमी" के रूप में अपनी पहचान बना चुकी हैं। एक ऐसी महिला जो समुदाय की जरूरतों और संरचनात्मक बदलाव के बीच सेतु बनाकर एक स्केलेबल एवं सामाजिक रूप से प्रासंगिक मॉडल चला रही है। उन्होंने अपने पहले ऋण का पुनर्भुगतान समय पर कर लिया है, जिससे उनका CIBIL स्कोर बेहतर हुआ है और अब वे अपने SHG तथा ग्राम संगठन की अन्य महिलाओं को सक्रिय रूप से मार्गदर्शन दे रही हैं।

नीलम करेंगी सूती पैड्स की एक नई श्रृंखला शुरू

नीलम का अगला लक्ष्य है नवाचार। वे अब उन महिलाओं के लिए पुन: प्रयोज्य सूती पैड्स की एक नई श्रृंखला शुरू करने जा रही हैं, जो डिस्पोजेबल विकल्प नहीं खरीद सकतीं। साथ ही, वे सरकारी स्कूलों के साथ मिलकर स्वच्छता किट वितरित करने की संभावनाएं भी तलाश रही हैं।
 
नीलम आज आज प्रदेश की उन सभी महिलाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं जो वंचित महिलाओं को सहायता प्राप्तकर्ता से समाधान निर्माता बना रही हैं। वित्तीय पहुँच, कौशल, डिजिटल दृश्यता और बाज़ार संपर्क जब इन्हें सही पारिस्थितिकी तंत्र समर्थन प्राप्त हो, तो नीलम जैसी ग्रामीण महिलाएं यह सिद्ध करती हैं कि नवाचार केवल महानगरों या इनक्यूबेटरों से नहीं आता। कभी-कभी, यह एक ऐसी महिला से आता है, जिसके पास एक दृढ़ संकल्प, SHG का मजबूत नेटवर्क और बदलाव का नेतृत्व करने का साहस होता है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें