सावित्रीबाई को महसूस हुआ कि देश में उन जैसी कितनी ही लड़कियां होंगी जो पढ़ना चाहती होंगी। शिक्षा ग्रहण करने के लिए बालिकाओं को संघर्ष न करना पड़े, इसके लिए सावित्री बाई फुले ने साल 1848 में महाराष्ट्र के पुणे में देश का पहला बालिका स्कूल स्थापित किया। बाद में उन्होंने लड़कियों के लिए 18 स्कूलों का निर्माण कराया।
यहां से सावित्रीबाई फुले एक समाज सेविका ही नहीं, बल्कि देश की पहली महिला शिक्षक, देश के पहले बालिका स्कूल की प्रिंसिपल बन गईं। पति के सहयोग से उन्होंने बालिकाओं को शिक्षा की ओर अग्रसर किया। 66 साल की उम्र में सावित्रीबाई फुले का 10 मार्च 1897 को निधन हो गया।