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Swega Saminathan: मिलिए 17 साल की स्वेगा समीनाथन से, जिन्होंने विश्व में बढ़ाया भारत का मान

Sun, 26 Dec 2021 01:26 PM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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स्वेगा समीनाथन - फोटो : सोशल मीडिया
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भारत का युवा वर्ग काफी होनहार है, खासकर लड़कियां। भारत जैसे देश में जहां लड़कियां घरों की इज्जत मानी जाती हैं, वह देश का मान भी बन रही हैं। वो महिलाएं जो परिवार संभालती है, वह देश के उच्च पदों को भी संभाल रही हैं। होनहार और काबिल महिलाओं की लिस्ट में सिर्फ पदासीन ही नहीं, बल्कि देश की बच्चियां भी शामिल हैं। हाल ही में एक नाम चर्चा में आया, जिसने न केवल अपनी काबलियत से भारत में बल्कि दुनियाभर में अपनी पहचान बना ली। ये नाम है, स्वेगा समीनाथन का। 17 साल की स्वेगा समीनाथन ने जो कारनामा कर दिया है, उससे केवल लड़कियां ही नहीं, बल्कि हर एक युवा वर्ग प्रोत्साहित हो रहा है। स्वेगा समीनाथन को अमेरिका के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में से एक यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो से करीब तीन करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति मिली है। इतनी बड़ी सफलता हासिल करने वाली स्वेगा एक साधारण से किसान परिवार की बेटी है। चलिए जानते हैं स्वेगा समीनाथन के बारे में सबकुछ।

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कौन है स्वेगा समीनाथन

स्वेगा समीनाथन तमिलनाडु के इरोड जिले की रहने वाली हैं। स्वेगा की उम्र मात्र 17 साल है। उनके पिता एक किसान हैं। स्वेगा अपने परिवार के साथ इरोड जिले के कसीपलयम नाम के छोटे से गांव में रहती हैं। स्वेगा एक ऐसे परिवार से आती हैं, जहां किसी भी सदस्य ने स्नातक की डिग्री हासिल नहीं की है। फिर भी स्वेगा ने उन सब के सपनों को पूरा कर दिया।

स्वेगा की उपलब्धि

स्वेगा 14 साल की उम्र से ही डेक्सटेरिटी ग्लोबल अकादमी से लीडरशिप डेवलपमेंट और करियर डेवलपमेंट कार्यक्रमों की ट्रेनिंग ले रही हैं। इतनी कम उम्र में स्वेगा ने कई अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में पुरस्कार हासिल किया है। इसके बाद स्वेगा को हाल ही में शिकागो यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के लिए 3 करोड़ की छात्रवृत्ति मिली है। शिकागो यूनिवर्सिटी विश्व की टॉप 10 यूनिवर्सिटी में से है।

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स्वेगा को कैसे मिली ये सफलता

होनहार स्वेगा ने अपनी इस सफलता का श्रेय परिवार को दिया। साथ ही डेक्सटेरिटी ग्लोबल के सीईओ शरद विवेक सागर को प्रेरणा माना। स्वेगा के मुताबिक, शरद विवेक सागर का भाषण उन्होंने अपने स्कूल में सुना था। बाद में स्वेगा की काबिलियत को समझते हुए डेक्सटेरिटी ग्लोबल ने उनका अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालयों से परिचय कराया।
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