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सुरभि और उनके पार्टनर मंदिर के फूलों से तैयार करते हैं अगरबत्ती और हवन कप, जिससे प्रदूषण को किया जा सके कम

Mon, 07 Jun 2021 10:30 AM IST
अपराजिता शुक्ला लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

महाराष्ट्र के शिरडी में मंदिरों में चढ़ने वाले फूलों को रिसाइकल करता देख दिल्ली के एक शख्स को ये आइडिया बेहद पसंद आया। जिसके बाद उन्होंने पार्टनर के साथ मिलकर दिल्ली के मंदिरों से फूलों को इकट्ठा कर उनसे ऑर्गेनिक अगरबत्ती, धूपबत्ती और हवन कप बनाने का काम शुरू किया। दिल्ली की निर्मलया नाम की ये संस्था मंदिरों में चढ़ने वाले फूलों को इकट्ठा कर इस काम को करती है। जिससे ये फूल नदियों में बहकर उसके पानी को प्रदूषित नहीं कर पाते हैं। 
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पड़े गेंदा के फूल - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मंदिरों में होने वाली पूजा में भक्त अक्सर प्रसाद से लेकर पैसा तक चढ़ाते हैं। जिनका इस्तेमाल मंदिरों में दान के रूप में किया जाता है। या फिर वो सारे इस्तेमाल हो जाते हैं। लेकिन मंदिर में चढ़ने वाले उन फूलों का क्या? ये फूल केवल कचरे के रूप में पास की नदियों में बहा दिए जाते हैं। इन फूलों में पड़े पेस्टीसाइड और कीटनाशक पानी को प्रदूषित भी करते हैं। ऐसे में दिल्ली की एक संस्था इन फूलों का इस्तेमाल पूजा में जलने वाली अगरबत्ती से लेकर धूप और हवन कप बनाने में किया। दिल्ली के 120 से ज्यादा मंदिरों से जुड़ी ये संस्था वहां से फूलों को इकट्ठा कर आर्गेनिक अगरबत्ती वगैरह बनाकर तैयार करती हैं। 

राजीव बंसल ने साल 2019 में महाराष्ट्र के शिरडी में देखा कि कैसे वहां पर चढ़े फूलों को रिसाइकिल किया जाता है। इसके बाद कुछ महीने की रिसर्च के बाद उन्होंने ये जाना कि कैसे फूलों को रिसाइकल कर इस्तेमाल में लिया जाता है। इसके बाद अपनी सिस्टर इन लॉ सुरभि के साथ मिलकर उन्होंने निर्मलाय संस्था की शुरूआत की। 

दिल्ली के धाम कॉम्प्लेक्स में फैक्ट्री को बनाया गया। यहां पर अपने रिसाइकिल के अपने तरीके को बनाने के बाद उन्होंने इसे पेटेंट भी करा लिया द काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च के अंतर्गत। शुरूआत में इस काम के लिए लगभग 40 महिलाओं को रखा गया था। लेकिन कोरोना महामारी की वजह से मंदिरों के बंद होने और फूलों के चढ़ावे में कमी की वजह से अब घटकर केवल 15 महिलाएं ही काम पर रहती हैं।  
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