सुहानी का सरल स्टार्टअप
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सुहानी ने बांबे आईआईटी से इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन पूरा करने के बाद डचेज बैंक में वांलटियर के तौर पर कॉरपोरेट सामाजिक जिम्मेदारी में काम करना शुरू किया। वहीं पर काम करते हुए सुहानी ने भारत में माहवारी के दौरान स्वच्छता की स्थितियों के बारे में सुना। जहां पर उन्हें पता चला कि करीब 70 फीसदी महिलाओँ को प्रजनन से जुड़ी संक्रमण की बीमारियां है। जिसका कारण ज्यादातर माहवारी के समय साफ-सफाई न रखना था। जहां से सुहानी को सरल स्टार्ट-अप शुरू करने का आइडिया आया।
सरल स्टार्ट-अप के तहत एक पैड करीब सात रुपये का पड़ता है। जिसे वो गांवों की महिलाओं को बेचती हैं। सुहानी बताती हैं कि काफी रिसर्च के बाद उन्होने डिस्ट्रिब्यूशन की लागत को कम किया है। क्योंकि वो पैड बेचने के साथ ही महिलाओं में जागरुकता भी फैलाती हैं। सुहानी बताती हैं कि सस्ते में चक्कर में वो कभी भी क्वालिटी से समझौता नहीं करती हैं।