कोरोना से बुरी तरह प्रभावित अमरीका और ब्रिटेन जैसे देशों में भी मास्क का इस्तेमाल अनिवार्य कर दिया गया है। अमेरिकी सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) ने लोगों से उन सार्वजनिक जगहों पर घरेलू मास्क पहनने की सिफारिश की, जहां सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना मुश्किल हो। यह सलाह कम्युनिटी ट्रांसमिशन की आशंका वाले जगहों को ध्यान में रखकर दी गई है।
भारत जैसे मुल्क में पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्वीपमेंट्स (पीपीई) की कमी है और सर्जिकल मास्क खरीदना हर किसी के लिए संभव नहीं है, ऐसे में शैलजा गुप्ता के मुताबिक घरेलू मास्क से लोगों को बचाने में मदद मिलेगी। शैलजा गुप्ता भारत के शीर्ष इंजीनियरिंग कॉलेज इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नॉलॉजी की पूर्व छात्रा हैं। वह देश के सबसे अभावग्रस्त इलाकों में भी काम कर चुकी है।
शैलजा मुंबई के सबसे बड़े झुग्गी झोपड़ी वाले धारावी में आउटरीच ऑफिसर के तौर पर पर काम कर चुकी हैं। इस इलाके में उन्होंने गरीब तबके के बच्चों को सस्ते माइक्रोस्कोप से जीवाणुओं के बारे में जागरूक किया है। जब भारत में कोरोना वायरस का संक्रमण फैलने लगा, तो शैलजा गुप्ता ने घर पर मास्क बनाने के तरीके का एक मैन्युएल तैयार किया और भारत की 22 आधिकारिक भाषाओं में उसका अनुवाद कराया।
इसके अलावा कोरोना संक्रमण के खिलाफ हर रणनीति में वह घरेलू मास्क को जरूरी हिस्से के तौर पर अपनाने की सलाह देती रहीं। अपने तर्क को दमदार बनाने के लिए शैलजा अंतरराष्ट्रीय जर्नल्स में मास्क के इस्तेमाल से जुड़े शोध पत्रों का हवाला भी देती हैं। चेक गणराज्य और दक्षिण कोरिया जैसे देशों में घरेलू मास्क का इस्तेमाल लगातार किया जा रहा है। चेक गणराज्य में तो मास्क के बिना बाहर निकलना गैर कानूनी है।
सस्ता उपाय है घरेलू मास्क
शैलजा गुप्ता के मुताबिक घरेलू मास्क किसी भी रंग के नए या पुराने सूती कपड़े से बनाया जा सकता है। उनके मुताबिक नौ गुना सात इंच की साइज में काटे गए कपड़े में चार डोरियां लगाने भर से फेस मास्क तैयार हो जाता है। इस घरेलू मास्क के जरिए मुंह और नाक को ढंका जा सकता है।
घरेलू मास्क को नियमित तौर पर साबुन और पानी से धोते रहना चाहिए। इसे फिर से इस्तेमाल करने लायक बनाना बहुत सस्ता है। दूसरी ओर प्लास्टिक फैब्रिक से बने डिस्पोजेबल सर्जिकल मास्क की कीमत दस रुपए है। डॉक्टरों और नर्सों के इस्तेमाल वाले एन95 मास्क की कीमत किसी दिहाड़ी मजदूर के एक दिन की आमदनी से भी ज्यादा 500 रुपए के करीब है।
भारत सरकार ने यह भी कहा है कि देश के 27 राज्यों के करीब 78 हजार स्वयंसेवी समूहों द्वारा दो करोड़ घरेलू मास्क तैयार कर लिए गए हैं। शैलजा गुप्ता के मुताबिक देश को जल्दी ही ऐसे एक अरब मास्क की जरूरत होगी। देश के अखबार समूह ने लोगों से अपना मास्क खुद बनाने की अपील करते हुए मास्क इंडिया अभियान ही शुरू कर दिया है।
आधिकारियों के मुताबिक इस अभियान का पूरा श्रेय शैलजा गुप्ता को जाता है। भारत सरकार के प्रमुख वैज्ञानिक सलाहकार के विजय राघवन ने बताया, "फेस मास्क की जरूरत को लेकर शैलजा की सोच स्पष्ट थी। उन्होंने अपनी टीम से एक प्रभावी मैन्युएल तैयार कराया। इस अभियान को आगे ले जाने को लेकर उनमें दृढ़ता भी थी, उनकी कोशिशों के चलते परिणाम साकारात्मक रहे।"