Sarojini Naidu Birth Anniversary : सरोजिनी नायडू को भारत की स्वतंत्रता संग्राम की प्रमुख नेता, कवयित्री और देश की पहली महिला राज्यपाल के रूप में याद किया जाता है। उनकी ओजस्वी वाणी और मधुर कविताओं के कारण उन्हें 'भारत कोकिला' (The Nightingale of India) कहा जाता है। हर साल 13 फरवरी को उनकी जयंती मनाई जाती है।
सरोजिनी नायडू सिर्फ एक राजनीतिक नेता ही नहीं, बल्कि महिला सशक्तिकरण की प्रतीक भी थीं। उनका जीवन संघर्ष, साहस और प्रेरणा से भरा हुआ था। उनकी जयंती (Sarojini Naidu Jayanti) पर हम सभी को उनके योगदान को याद कर उनके आदर्शों से सीख लेनी चाहिए। आइए जानते हैं उनके जीवन और उपलब्धियों के बारे में।
सरोजिनी नायडू का प्रारंभिक जीवन
- सरोजिनी नायडू का जन्म 13 फरवरी 1879 को हैदराबाद में हुआ था।
- उनके पिता अघोरनाथ चट्टोपाध्याय एक वैज्ञानिक और शिक्षाविद थे और उनकी माता बरदा सुंदरी एक कवयित्री थीं।
- उनकी शिक्षा पहले मद्रास में हुई, फिर किंग्स कॉलेज, लंदन और बाद में कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी में संपन्न हुई।
स्वतंत्रता संग्राम में योगदान
- सरोजिनी नायडू महात्मा गांधी के विचारों से प्रभावित होकर स्वतंत्रता आंदोलन में शामिल हुईं।
- 1915-1918 में उन्होंने भारत के विभिन्न हिस्सों में यात्रा कर महिलाओं को स्वतंत्रता संग्राम से जोड़ा।
- 1919 में सरोजिनी नायडू ने रॉलेट एक्ट के खिलाफ आंदोलन में भाग लिया।
- 1925 में सरोजिनी नायडू भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की पहली महिला अध्यक्ष बनीं।
- 1930 में नमक सत्याग्रह के दौरान उन्हें गिरफ्तार किया गया।
- 1942 में उन्होंने भारत छोड़ो आंदोलन में भी भाग लिया और जेल गईं।
भारत की पहली महिला राज्यपाल
- 15 अगस्त 1947 को भारत की स्वतंत्रता के बाद, उन्हें उत्तर प्रदेश की पहली महिला राज्यपाल बनाया गया।
- इस पद पर रहते हुए 2 मार्च 1949 को उनका निधन हो गया।
सरोजिनी नायडू की प्रमुख उपलब्धियां
- सरोजिनी नायडू भारत की पहली महिला राज्यपाल थीं।
- भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की पहली महिला अध्यक्ष नियुक्त हुईं।
- उन्हें कवि के रूप में प्रसिद्ध – ‘भारत कोकिला’ का खिताब मिला।
- महिलाओं को स्वतंत्रता संग्राम में प्रेरित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।