एकतारा संस्था हैंडमेड स्टेशनरी बनाती है, जिसे प्रशिक्षित गृहिणियों द्वारा तैयार किया जाता है।
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एक गृहणी के लिए अपने सपनों को उड़ान देना, घर संभालते हुए व्यवसाय या अपने करियर पर पूरी तरह से फोकस करना आसान नहीं होता। युवा महिलाओं के लिए तो फिर भी कई विचार, नवाचार और मार्ग होते हैं, लेकिन जीवन के 50 वर्ष पूरे कर चुकी एक गृहणी जब खुद का व्यवसाय शुरू करती है तो चुनौतियां ज्यादा होती हैं। हालांकि राजस्थान के कोटा की महिलाओं ने न केवल इन चुनौतियों का सामना किया, बल्कि अपने सपनों को पूरा कर एक खास मुकाम बनाने में कामयाबी भी हासिल की। ये प्रेरणादायक कहानी राजस्थान के कोटा की रहने वाली मीनाक्षी झावर की है। आइए जानते हैं मीनाक्षी के सपनों और उन्हें पूरा करने के उनके जुनून के बारे में।
मीनाक्षी झावर में कुछ नया करने का जुनून था लेकिन शुरुआत कहां से करें, ये पता नहीं था। जब उन्हें कुछ सूझ नहीं रहा था, तो उन्हें आशा की एक किरण अपनी बेटी में दिखी। मीनाक्षी की बेटी ऐश्वर्या डिजाइनिंग की पढ़ाई कर रही हैं। वह डिजाइनिंग की पढ़ाई के लिए कर्नाटक के बीदर इलाके में गईं। ऐश्वर्या ने देखा कि बीदर में रहने वाली गृहणियां हुनरमंद और प्रतिभाशाली हैं लेकिन उनके पास अपनी प्रतिभा को दिखाने का कोई जरिया नहीं था।
उनके सपने और हुनर घर की चार दीवारों तक ही कैद था। ऐश्वर्या को यहां से हैंडमेड स्टेशनरी बनाने का विचार आया। उन्होंने अपनी मां मीनाक्षी के साथ मिलकर अपने विचारों के क्रियान्वयन का प्रयास शुरू किया। मीनाक्षी भी बीदर की उन्हीं महिलाओं की तरह थीं, जिन्हें बस एक रास्ते की तलाश थी। मीनाक्षी और ऐश्वर्या की मां बेटी की जोड़ी ने 'एकतारा' नाम की संस्था बनाई जो गृहिणियों के जीविकोपार्जन और उन्हें सशक्त बनाने का काम करती है।
एकतारा संस्था हैंडमेड स्टेशनरी बनाती है, जिसे प्रशिक्षित गृहिणियों द्वारा तैयार किया जाता है। यह स्टेशनरी ईको फ्रेंडली होती है। इससे कई सारी जरूरतमंद महिलाओं को रोजगार मिलता है। मीनाक्षी और ऐश्वर्या ने गृहिणियों के साथ मिलकर 75 हजार मीटर से अधिक बेकार पड़े कपड़ों को रिसाइकल कर हस्तनिर्मित उत्पादों में बदला और शेष बचे अवशेषों से अलग-अलग उत्पाद, जैसे कटलरी होल्डर, बुकमार्क और पोस्टकार्ड आदि बनाए। अब तक मीनाक्षी और ऐश्वर्या 32 गृहणियों को प्रशिक्षित करके उन्हें रोजगार दे चुकी हैं। साथ ही अन्य जरूरतमंद महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनाने में जुटी हैं।